काम की बात: दिल्ली में सभी बोरवेल के लिए वाटर मीटर होंगे जरूरी, नई बोरवेल पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्लीवालों को जल्द ही घरों के अंदर अवैध रूप से कराए गए बोरवेल के लिए भी बिल चुकाना पड़ सकता है। दिल्ली सरकार इसके लिए एक नई पॉलिसी लाने जा रही है, जिसका ड्राफ्ट भी तैयार हो गया है।

दिल्ली में सभी बोरवेल के लिए वाटर मीटर होंगे जरूरी, नई बोरवेल पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार

दिल्ली सरकार राजधानी में अवैध भूजल दोहन रोकने के लिए एक नई बोरवेल पॉलिसी बना रही है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसके तहत सभी घरेलू और कमर्शियल बोरवेल पर वाटर मीटर लगाए जाएंगे। हालांकि सरकार ने भूजल इस्तेमाल पर कितना चार्ज लगेगा, अभी तक इसके लिए रेट तय नहीं किए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित पॉलिसी में वर्तमान में चल रहे हजारों अवैध बोरवेल को रेगुलर करने का तरीका भी बताया जाएगा। इस नीति के तहत बोरवेल कराने वाले यूजर्स से वाटर मीटर की मदद से उनके द्वारा जमीन से निकाले गए पानी की मात्रा के आधार पर चार्ज वसूला जाएगा।

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि इस पॉलिसी का मकसद वन टाइम अप्रूवल के बजाय लगातार निगरानी और असल में इस्तेमाल किए गए भूजल के आधार पर यूजर चार्ज लागू करना है। अधिकारी ने बताया सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) के पास अवैध बोरवेल के लिए तो पर्यावरण मुआवजे से जुड़े नियम लागू करने के अधिकार हैं, लेकिन वैध तरीके से भूजल निकालने के लिए कोई टैरिफ तय नहीं है। हमने इसके लिए टैरिफ तय करने के तरीके पर CGWB और पर्यावरण विभाग से सुझाव मांगे हैं। नई व्यवस्था के तहत हर बोरवेल कनेक्शन पर मीटर लगाया जाएगा और उपभोक्ता जितना भूजल निकालेंगे उसी हिसाब से बिल का भुगतान करेंगे। इस पॉलिसी में मौजूदा अवैध बोरवेल को मंजूरी देने का तरीका भी बताया जाएगा।

अधिकारियों ने पिछले साल एनजीटी को राजधानी में 15,962 अवैध बोरवेल सील किए जाने की जानकारी दी थी। लेकिन अधिकारियों ने यह भी माना था कि अवैध बोरवेल की असली संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

पानी के कनेक्शन की जांच को होगा सर्वे

अधिकारी ने कहा कि अधिकतर अवैध बोरवेल घरों के अंदर के चलते इनकी पहचान करना बहुत कठिन है। इनकी लाखों में भी हो सकती है। हम पानी के कनेक्शन की जांच के लिए घर-घर जाकर सर्वे शुरू करने वाले हैं और इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या सर्वे के दौरान बोरवेल से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा सकती है।

राजधानी में फिलहाल पहले से मंजूरी लिए बिना बोरवेल लगवाना मना है। दिल्ली जल बोर्ड, जिला प्रशासन, सीजीडब्ल्यूबी और दूसरी एजेंसियों के अधिकारियों वाली जिला-स्तरीय सलाहकार कमेटियां आवेदनों की जांच-पड़ताल करती हैं। इसके साथ ही ये कमेटियां आम तौर पर सिर्फ उन्हीं इलाकों में बोरवेल लगाने की मंजूरी देती हैं जहां जमीन के नीचे पानी का स्तर ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं आता है।

अभी भूजल दोहन की निगरानी का कोई तरीका नहीं

जल बोर्ड के एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि 2010 से यही सिस्टम लागू है। आवेदक सिर्फ एक बार 500 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देते हैं। एक बार मंजूरी मिलने के बाद इस बात की कोई निगरानी नहीं की जाती कि कितना भूजल निकाला जा रहा है। नई पॉलिसी में पानी के बिल की तरह ही अनिवार्य मीटर और बार-बार लगने वाले यूजर चार्ज लागू करके इस कमी को दूर करने की कोशिश की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि पॉलिसी का ड्राफ्ट सुझाव और भूजल दोहन के चार्ज तय करने के के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाले सीजीडब्ल्यूबी को भेजा गया है। खबर लिखे जाने तक दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के प्रवक्ता की तरफ से इस पर प्रतिक्रिया के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया गया।

Praveen Sharma

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Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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