सच कहूं दिल टूट गया, मुझे बलि का बकरा बना दिया; विजेता दहिया का छलका दर्द
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच बर्गर खाने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रवक्ता विजेता दहिया को पद से हटा दिया। इस पर दहिया का दर्द छलका है। उन्होंने कहा कि सच कहूं तो दिल टूट गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने प्रवक्ता विजेता दहिया को मंगलवार को सारी जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए पद से हटा दिया था। CJP का यह ऐक्शन उस वायरल वीडियो के बाद हुआ जिसमें संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच वह बर्गर खाते नजर आए थे। अब CJP के ऐक्शन लेने पर विजेता दहिया का बयान सामने आया है। उन्होंने एक वीडियो में कहा कि सीजेपी से फायर कर दिया गया, कैसा लगा? सच कहूं दिल टूट गया। मुझे तो बलि का बकरा बना दिया गया।
एक ही दिन में दो घटनाएं
विजेता दहिया ने एक वीडियो संदेश में कहा कि एक ही दिन में दो घटनाएं हुईं। एक जब मैं जंतर-मंतर से घर आ रहा था तो मेट्रो पर और दूसरा जब जंतर मंतर आ रहा था तब… मनुवादी आ गए वहां पर और मेरे साथ धक्का मुक्की भी की। काफी लोगों के फोन आ रहे थे कि विजेता तुम सेफ तो हो ना कोई दिक्कत तो नहीं हुई।
चानक कहा कि विजेता मत आओ…
विजेता दहिया ने आगे बताया कि इसी बीच देखता हूं कि अभिजीत का फोन आ रहा है। मैंने सोचा यह तो अच्छी बात है। मैंने सोचा कुशलता के बारे में पूछेंगे। लेकिन उन्होंने अचानक कहा कि विजेता मत आओ। मैंने पूछा क्यों? क्या हो गया? उन्होंने कहा कि नहीं-नहीं आपका बर्गर वाला मामला हो गया। मैंने कहा कि ट्रोलर्स जो बकवास कर रहे हैं वो तो करें लेकिन आप लोग तो देख रहे हैं ना कि मैं पिछली दो रातों से वहां हूं।
अभिजीत जब तुम कचौड़ी खा रहे थे…
विजेता दहिया ने कहा कि हमारी मार्च नौ बजे शुरू होनी थी। वह लेट हुई। फिर मैं मार्च में भी गया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। मेरी आंखों में जलन हो रही थी। मैं दूसरी ओर से घूमकर केरला हाउस वाले इलाके में पहुंचा। मैंने कहा कि अभिजीत तुम तो यह देख रहे हो ना। फिर उन्होंने कहा कि नहीं-नहीं वह वीडियो बहुत वायरल हो रहा है। फिर मैंने कहा कि अभिजीत जब तुम कचौड़ी खा रहे थे। वह भी तो वायरल हुई थी। तब तो हम तुम्हारे साथ थे।
…तब तो मैंने तुम्हारा बचाव किया
विजेता दहिया ने कहा कि तब तो हमने तुम्हारा बचाव किया। मार्च के बारे में अब भी लोग कह रहे हैं कि अभिजीत तो खुद को बचाने के लिए ट्रक पर चढ़ गया। फिर भी मैंने आपका बचाव किया है। अभिजीत को थप्पड़ भी लगे हैं। मुझे भी जान से मारने की धमकियां मिली हैं। एक ऐसे समय जब मैं उस प्रोपेगेंडा से लड़ रहा था तब पता चलता है कि टीम के साथियों ने ही मुझे बलि का बकरा बना दिया तो बुरा तो लगा जबकि आलोचना करने वाले प्रदर्शनकारी नहीं थे।
मुझे निकालने से आंदोलन को फायदा होगा तो अच्छी बात
विजेता दहिया ने आगे कहा कि मुझे ट्रोल करने वाले मनुवादी थे। उनको मेरी इस बात से दिक्कत थी कि प्रेमानंद मेरे लिए महाराज नहीं हैं। मैं फिर से कहता हूं कि यदि आप आसाराम को राम और कृष्ण से तुलना करेंगे तो मेरे लिए महाराज नहीं हैं। मुझे बाहर का रास्ता दिखाना कोई जिम्मेदारी का काम नहीं है। यह घुटने टेकने वाली बात है। इस वजह से मुझको बुरा लगा लेकिन उनको लगता है कि इससे आंदोलन को फायदा होगा तो यह अच्छी बात है।


