उत्तम नगर हत्याकांड पर भी जालसाजी, मदद के नाम पर जमा करा लिए लाखों रुपए; पुलिस ने लिया ऐक्शन
दिल्ली के उत्तम नगर हत्याकांड में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ी एक वीडियो जारी कर संदिग्ध बैंक खाते में लगभग 37 लाख रुपए जमा करा लिए गए। वायरल हुए इस वीडियो में लोगों से आर्थिक मदद मांगने वाला एक क्यूआर कोड था।

दिल्ली के उत्तम नगर हत्याकांड में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ी एक वीडियो जारी कर संदिग्ध बैंक खाते में लगभग 37 लाख रुपए जमा करा लिए गए। वायरल हुए इस वीडियो में लोगों से आर्थिक मदद मांगने वाला एक क्यूआर कोड था।
क्यूआर कोड के जरिए ठगी
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि उत्तम नगर हत्याकांड के संबंध में अफवाहें फैलाने और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में कई सोशल मीडिया खातों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें वित्तीय दान मांगने वाला एक वायरल वीडियो भी शामिल है। 10 मार्च को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें घटना से जुड़ी कहानियों का इस्तेमाल करते हुए लोगों से वित्तीय सहायता मांगने वाला एक क्यूआर कोड था। सत्यापन के दौरान पता चला कि पिछले दो दिनों में संदिग्ध बैंक खाते में लगभग 37 लाख रुपए जमा हो चुके थे।
बैंक मैनेजर से रकम फ्रीज करने को कहा
द्वारका के डीसीपी कुशल पाल सिंह ने कहा कि आम जनता के साथ संभावित धोखाधड़ी को देखते हुए संबंधित ब्रांच के बैंक मैनेजर को सूचना दिया गया। उनसे उस खाते की सभी क्रेडिट और डेबिट सुविधाओं को ब्लॉक करने और जनता द्वारा जमा की गई राशि को फ्रीज करने के लिए कहा गया है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की
डीसीपी ने बताया कि उत्तम नगर में 4 मार्च को हुई झड़प में 26 साल के युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद घटना से जुड़े सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक और भड़काऊ सामग्री को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऐसी सामग्री को हटाने के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के साथ समन्वय किया।
भड़काऊ सामग्री हटाने का अनुरोध
अधिकारी ने बताया कि अब तक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को 14 सामग्री हटाने के अनुरोध भेजे गए हैं। इसी तरह के आठ अनुरोध इंस्टाग्राम को भड़काऊ सामग्री हटाने के लिए भेजे गए हैं।
पुलिस ने चेतावनी दी
पुलिस ने बताया कि अफवाह फैलाने और अपुष्ट जानकारी प्रसारित करने में शामिल सोशल मीडिया अकाउंट चलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने दोहराया कि सोशल मीडिया पर झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दंडनीय अपराध है। पुलिस ने चेतावनी दी कि गलत सूचना के माध्यम से सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
होली के दिन हुई थी हत्या
इससे पहले, पुलिस ने स्पष्ट किया था कि उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में होली के दौरान 4 मार्च को पड़ोसियों के दो गुटों के बीच हुई झड़प में मारे गए तरुण की हत्या के सिलसिले में दो नाबालिगों और 14 वयस्कों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में पर्याप्त पुलिस बल तैनात होने से स्थिति नियंत्रण में है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


