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उपहार सिनेमा: पासपोर्ट आवेदन में गलत जानकारी देने को लेकर सुशील पर तय होंगे आरोप

उपहार सिनेमा: पासपोर्ट आवेदन में गलत जानकारी देने को लेकर सुशील पर तय होंगे आरोप

संक्षेप:

उपहार सिनेमा अग्निकांड के दोषी और कारोबारी सुशील अंसल की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट सुशील के खिलाफ पासपोर्ट आवेदन में झूठी जानकारी देने को लेकर आरोप तय करने का आदेश दिया है। 

Dec 02, 2025 09:12 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, निखिल पाठक, नई दिल्ली
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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड के दोषी और कारोबारी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट आवेदन में झूठी जानकारी देने और तथ्यों को छिपाने के आरोप में आरोप तय करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रिया अग्रवाल की अदालत ने पाया कि अंसल ने वर्ष 2013 और 2018 में पासपोर्ट जारी कराने व नवीनीकरण के दौरान लंबित आपराधिक मामलों और उपहार कांड में सजा की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी।

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क्या बोली अदालत?

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और गलत जानकारी देकर पासपोर्ट हासिल करने का मामला बनता है। मामला 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश से शुरू हुआ था। उसमें उपहार कांड पीड़ितों के संगठन एवीयूटी की याचिका पर अंसल द्वारा वर्षों तक गलत जानकारी के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने के आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए थे।

हलफनामे में कही थी यह बात

जांच में सामने आया था कि अंसल ने साल 2013 में तात्कालिक योजना के तहत पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के समय यह हलफनामा दिया था कि उनके खिलाफ न तो कोई आपराधिक मामला लंबित है और न ही वे किसी मामले में सजा काट रहे हैं जबकि रिकॉर्ड में उनको हुई सजा और कई आपराधिक मामले दर्ज थे।

पुलिस सत्यापन से बचने का भी प्रयास

अदालत ने कहा कि अंसल न सिर्फ इन मामलों को छिपाते रहे, बल्कि गलत पते का उपयोग कर पुलिस सत्यापन से भी बचने की कोशिश की। कोर्ट ने यह भी माना कि गलत जानकारी के आधार पर पासपोर्ट जारी होने से अंसल को प्रत्यक्ष लाभ हुआ। यह आचरण आईपीसी की धारा 420, 177, 181 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत दंडनीय है।

क्या दी दलील?

बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अंसल पर पहले ही पासपोर्ट प्राधिकरण द्वारा जुर्माना लगाया जा चुका है। इसलिए दोबारा कार्रवाई दोहरा जोखिम होगी। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक दंड, आपराधिक अभियोजन को नहीं रोकता। अदालत ने सुशील के खिलाफ इस मामले में आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अब इस मामले में 13 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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