
उमर खालिद मेरा गुरु नहीं; दिल्ली की अदालत में शरजील इमाम
दिल्ली दंगों के आरोपी और एक्टिविस्ट शरजील इमाम ने गुरुवार को एक अदालत में बताया कि पुलिस का यह यह आरोप सरासर गलत है कि उमर खालिद उसका मेंटर या गुरु था। दावा किया कि जेएनयू में पढ़ाई के दौरान दोनों में कोई दोस्ती नहीं थी।
दिल्ली दंगों के आरोपी और एक्टिविस्ट शरजील इमाम ने गुरुवार को एक अदालत में बताया कि पुलिस का यह यह आरोप सरासर गलत है कि उमर खालिद उसका मेंटर या गुरु था। शरजील इमाम ने यह भी दावा किया कि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच बातचीत नहीं होती थी।
बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक कड़कड़डूमा कोर्ट के अडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी के सामने इमाम की तरफ से पेश हुए वकील तैयब मुस्तफा ने कहा कि उनके मुवक्किल और खालिद के बीच कोई कनेक्शन नहीं है। खालिद की ओर से कहा गया, ‘जेएनयू में मेरे पांच साल के दौरान मैंने कभी उमर खालिद से बात नहीं की। मुझे नहीं पता कि वे (पुलिस) किस समन्वय की बात कर रहे हैं। साजिश को साबित करने के लिए हमारे बीच समझौता दिखाना आवश्यक है। लेकिन वे कोई अग्रीमेंट दिखाने में असफल रहे हैं।’
शरजील इमाम का दावा- मीटिंग में हिंसा पर बात नहीं
वकील ने जोर देकर कहा कि खालिद ने इमाम को निर्देश दिए थे, इस तरह के आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा, 'केवल एक मुलाकात है जिसमें उमर और मैं साथ दिख रहे हैं। लेकिन उस मीटिंग के गवाह से पता चलता है कि हिंसा पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।' मुस्तफा दिल्ली दंगों के साजिश केस में पक्ष रख रहे थे। इस समय अदालत आरोप तय किए जाने पर दलीलों को सुन रही है।
साजिश की बात से इनकार
दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि इमाम, खालिद और अन्य कई लोग 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा की साजिश रचने में शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों का हवाला दिया है। मुस्तफा ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ 2020 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे थे और चूंकि कई आरोपी इस कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे इसका मतलब यह नहीं कि कोई साजिश थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि इमाम ने कभी भी हिंसक विरोध प्रदर्शनों का समर्थन नहीं किया।
मैंने तो अहिंसा पर बात की: इमाम
वकील ने कहा, 'मेरे चैट्स, मेरे पंपलेट और मेरे भाषण... उनका कहना है कि मैं हिंसा चाहता था, कि मैं चाहता था कि दंगे हो और लोग मारे जाए. लेकिन मेरी किसी बैठक में हिंसा पर चर्चा नहीं हुई थी। बल्कि मैंने तो अहिंसा पर बात की थी।' इमाम के वकील ने अपनी दलीलें पूरी कीं। अगले सप्ताह दूसरे आरोपियों के वकील अपना पक्ष रख सकते हैं।

लेखक के बारे में
Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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