जीने का अधिकार कानून से ऊपर नहीं; उमर खालिद-शरजील इमाम पर SC की बड़ी बातें
दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी। दोनों इस मामले में एक साल तक जमानत याचिका भी दाखिल नहीं कर सकेंगे। पिछले पांच वर्षों से यूएपीए के तहत दोनों तिहाड़ जेल में बंद हैं।

दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी। दोनों इस मामले में एक साल तक जमानत याचिका भी दाखिल नहीं कर सकेंगे। पिछले पांच वर्षों से यूएपीए के तहत दोनों तिहाड़ जेल में बंद हैं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पेश किए गए तथ्यों और सबूतों के आधार पर इन दोनों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून यानी ‘गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम’ (यूएपीए) 1967 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
हालांकि, इसी मामले में कोर्ट ने पांच अन्य आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। जमानत पाने वालों में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं।
जीने का अधिकार संवैधानिक लेकिन…
जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘जीने का अधिकार संवैधानिक है, लेकिन कानून से ऊपर नहीं।’ पीठ ने कहा कि इस मामले में सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग है, इसलिए जमानत याचिका पर फैसला करते समय सामूहिक दृष्टिकोण अपनाने के बजाए आरोपी की स्वतंत्र भूमिका का विश्लेषण किया गया है।
उमर और शरजील की भूमिका बाकियों से अलग
कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील की भूमिका इस मामले के अन्य आरोपियों से अलग है। पेश साक्ष्यों के विश्लेषण से पहली नजर में खालिद और इमाम के दिल्ली हिंसा में एक केंद्रीय और निर्णायक भूमिका निभाने के साथ-साथ योजना बनाने, लामबंदी और रणनीतिक दिशा के स्तर पर भागीदारी का पता चलता है। पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम बाकी आरोपियों से अलग स्थिति में थे। साक्ष्यों कथित अपराध को अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका होने का संकेत देती है।
फैसले के छह आधार और बड़ी टिप्पणियां
सबकी भूमिका अलग: सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग है, इसलिए फैसला करते समय सामूहिक दृष्टिकोण के बजाए आरोपी की स्वतंत्र भूमिका पर विचार किया गया
यूएपीए की परिभाषा: यूएपीए की धारा 15 केवल प्रत्यक्ष हिंसा ही नहीं, बल्कि सेवाओं में बाधा डालने और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्यों पर भी लागू होती है
हिंसा की योजना, भीड़ जुटाने में थे शामिल: उमर, शरजील सिर्फ प्रदर्शनकारी नहीं बल्कि हिंसा की योजना, भीड़ जुटाने और रणनीति बनाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे थे
अपराध में भागीदारी: अपराध में गहरी भागीदारी का स्तर उन्हें अन्य आरोपियों से अलग करता है। कार्यवाही के इस चरण में उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।
ट्रायल में देरी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी का तर्क ट्रंप कार्ड नहीं हो सकता है। सिर्फ इसके आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती है।
जमानत का मतलब आरोप कमजोर होना नहीं: शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि आरोपियों को जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ लगे आरोप कमजोर हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 5 आरोपियों को 11 शर्तों पर जमानत दी है और साफ किया है कि इन शर्तों का उल्लंघन होने पर ट्रायल कोर्ट आरोपी का पक्ष सुनने के बाद जमानत रद्द कर सकता है।

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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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