
अगर बेल्ट बदल दी जाती तो…; गाजियाबाद में क्रेन का हुक टूटने से 2 मजदूरों की मौत, 2 घायल
क्रेन की चपेट में चार मजदूर आ गए। हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है। परिजन मुआवजे की मांग को लेकर शव फैक्टरी परिसर में रखकर हंगामा भी कर रहे है।
गाजियाबाद में दिल्ली मेरठ मार्ग पर सिबली औद्योगिक क्षेत्र में ऑटो पार्ट बनाने वाली फैक्टरी में सोमवार शाम को क्रेन का हुक टूटने से बड़ा हादसा हो गया। क्रेन की चपेट में चार मजदूर आ गए। हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है। परिजन मुआवजे की मांग को लेकर शव फैक्टरी परिसर में रखकर हंगामा भी कर रहे है। मौके पर पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।
जानिए कैसे हो गया हादसा?
ये मामला निवाड़ी थानाक्षेत्र में सिबली औद्योगिक क्षेत्र परिसर में केईजीएन ऑटो मोबाइल प्राईवेट लिमिटेड नामक कंपनी का है। कंपनी में मोटर वाहन के ऑटो पार्टस बनाने की मशीन बनाए जाते और 85 कर्मचारी काम करते हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम करीब पांच बजे फैक्टरी परिसर में क्रेन से लोहे का भारी फ्रेम उठाया जा रहा था। इसी बीच क्रेन का हुक टूट गया और वह तेज गति से नीचे जमीन पर आ गिरी। क्रेन के नीचे चार मजदूर आ गए।
दो मजदूरों की मौत, अन्य गंभीर
वहां पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह से क्रेन को हटाकर नीचे दबे मजदूरों को किसी तरह बाहर निकाला और स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर दो मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने अनुसार मृतकों के नाम 45 वर्षीय आजाद पुत्र अहमद अली निवासी प्रीतविहार कॉलोनी ,19 वर्षीय शाहिद अंसारी पुत्र नसीर अंसारी निवासी मलिक नगर कॉलोनी मुरादनगर व घायलों के नाम अयान ,सलीम निवासी मुरादनगर बताया गया। मौत की खबर सुनकर परिजन सैकड़ों लोगों के साथ फैक्टरी में पहुंच गए।
फैक्टरी परिसर में शव रखकर किया हंगामा
क्रेन की चपेट में आकर हुई आजाद व शाहिद की मौत की सूचना के बाद परिजन भी मौके पर पहुंच गए। दोनों के परिजनों ने शव को फैक्टरी परिसर में रख दिए और हंगामा करना शुरु कर दिया। परिजनों का कहना है कि लापरवाही के चलते ही दोनों की मौत हुई है। हंगामा बढ़ने की सूचना पर निवाड़ी थानाप्रभारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और लोगों को सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराने का प्रयास किया। फैक्टरी स्वामी की गिरफ्तारी की व मृतकों के परिजनों 15-15 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग पर अडे़ हुए और अभी तक शव भी नहीं उठने दिए है।
कर्मचारियों ने लगाए लापरवाही के आरोप
फैक्टरी परिसर में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बताया कि जिस क्रेन से फ्रेम उठाया जा रहा है, वह बेल्ट काफी कमजोर थी। कर्मचारियों ने कई बार बेल्ट बदलने की मांग कर चुके थे। यदि बेल्ट बदल दी जाती तो शायद यह हादसा नहीं होता। जिस समय हादसा हुआ था कि अधिकांश मजदूर फैक्टरी से जा चुके थे। यदि दोपहर के समय यह हादसा होता तो ज्यादा जनहानि हो सकती थी।
मृतकों की कमाई से चलता था परिवार
मृतक आजाद के परिवार में पत्नी रुबीना ,पुत्र 12 वर्षीय अज्जु,छह वर्षीय उवेद व पुत्री 8 वर्षीय इफरा है। आजाद की कमाई से ही पूरे परिवार का लालन पालन चलता था। आजाद की मौत के बाद अब परिवार के सामने रोजी रोटी का सकंट पैद हो गया है। वहीं मृतक शाहिद भी अपने परिवार में अकेले ही कमाने वाला था।

लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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