गाजियाबाद में घर से भागीं दो बहनें, पिता को मैसेज कर कहा- हमें आजादी चाहिए, हम आपके लिए मर गए
गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र से दो नाबालिग बहनें घर छोड़कर चली गईं। दोनों ने पिता को इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजकर कहा कि हमें आजादी चाहिए। हम जहां हैं, वहां खुश हैं। हम आपके लिए मर गए। सोमवार को पिता ने भी थाने में पत्र देकर कहा कि अब उनका बेटियों से कोई संबंध नहीं है।

गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र से दो नाबालिग बहनें घर छोड़कर चली गईं। दोनों ने पिता को इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजकर कहा कि हमें आजादी चाहिए। हम जहां हैं, वहां खुश हैं। हम आपके लिए मर गए। सोमवार को पिता ने भी थाने में पत्र देकर कहा कि अब उनका बेटियों से कोई संबंध नहीं हैं।
पिता ने बताया कि दोनों नशे की आदी हैं और पांच बार घर छोड़ चुकी हैं और अब थक गए हैं। खोड़ा की एक कॉलोनी में रहने वाले व्यक्ति नोएडा की एक कंपनी में काम करते हैं। पिता सोमवार को खोड़ा थाने पहुंचे। पुलिस को बताया कि उनकी 14 और 16 साल की बेटियां न्यू कोंडली के एक सरकारी विद्यालय में आठवीं और नौवीं कक्षा में पढ़ती हैं। बीते एक वर्ष से दोनों का व्यवहार बदल गया था।
दोनों इंस्टाग्राम पर शराब, गांजा और सिगरेट पीने के वीडियो बनाकर डालती हैं। एक साल में दोनों पांच बार घर से जा चुकी हैं। चार पर वह खुद ढूंढ़कर लाए और एक बार पुलिस ने दोनों को बरामद किया था।
अब कुछ बड़ा बनकर लौटेंगी
पिता ने बताया कि 27 मार्च को पहले छोटी बेटी घर से चली गई थी। इसके बाद एक अप्रैल को बड़ी बेटी भी उसके साथ चली गई। वह दोनों को तलाश रहे थे, लेकिन दोनों का सुराग नहीं मिला। दोनों ने इंस्टाग्राम के माध्यम से उन्हें मैसेज भेजकर कहा कि वे घर वापस नहीं आएंगी। मैसेज में लिखा है कि हमें आजादी चाहिए और जहां हैं, वहां खुश हैं। अब कुछ बड़ा बनकर लौटेंगी। पीड़ित के मुताबिक, एक साल पहले तक दोनों बेटियां पढ़ाई में बहुत होशियार थीं। उन्हें और शिक्षकों को उम्मीद थी कि दोनों अफसर बनेंगी, लेकिन गलत संगत में पड़कर दोनों नशे की आदी हो चुकी हैं।
काफी मिन्नतों के बाद भी वापस नहीं आईं
पिता का कहना है कि समझाने के बावजूद दोनों घर लौटने को तैयार नहीं हैं। दोनों के व्यवहार से इलाके में काफी शर्मिंदगी महसूस होती है। अपनी मां से गाली देकर बात करती हैं। पिता ने कहा कि उन्होंने काफी मिन्नतें की, लेकिन बेटियों ने कहा कि तुम्हारे लिए हम मर गए।
अब बेटियों से कोई संबंध नहीं
परेशान पिता ने खोड़ा थाना पुलिस को पत्र देकर कहा है कि अब उनका बेटियों से कोई संबंध नहीं है और उनके साथ होने वाली किसी भी घटना के लिए वह जिम्मेदार नहीं होंगे। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। दोनों किशोरियों को बरामद कर कॉउंसिलिंग कराई जाएगी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


