
समाज के लिए घातक; हेरोइन तस्करी मामले में दो दोषियों को 10 साल की जेल
दिल्ली के द्वारका जिला अदालत ने 7.62 किलो हेरोइन तस्करी के मामले में सजा सुनाते हुए साफ किया है कि नशे का कारोबार समाज के लिए घातक है।
दिल्ली के द्वारका जिला अदालत ने 7.62 किलो हेरोइन तस्करी के मामले में सजा सुनाते हुए साफ किया है कि नशे का कारोबार समाज के लिए घातक है। विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश मनु गोयल खरब की अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए अब्दुल खालिक नूरजई और गुलाम हजरत मिर्जाले को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर अलग-अलग धाराओं में कुल तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत के मुताबिक, जांच में सामने आया था कि अब्दुल खालिक के पास से 4.02 किलो और गुलाम हजरत के पास से 3.60 किलो हेरोइन बरामद हुई थी, जिसे प्लास्टिक की बोतलों में छिपाकर रखा गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि दोनों दोषियों के कृत्य समाज को गहरी चोट पहुंचाने वाले हैं और उन्हें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।
पांच साल से न्यायिक हिरासत में
वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपी पिछले करीब पांच साल से न्यायिक हिरासत में हैं। पहली बार किसी आपराधिक मामले में फंसे हैं और जेल में उनका आचरण संतोषजनक रहा है। यह भी दलील दी गई कि दोनों के परिवार पूरी तरह उन पर निर्भर हैं और आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। अदालत ने सजा तय करते समय इन तथ्यों को भी रिकॉर्ड पर लिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सजा सुनाते समय गंभीरता और मानवीय पहलुओं के बीच संतुलन जरूरी है। इसी आधार पर दोनों को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21(सी) और 23(सी) के तहत 10-10 साल का कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माना, जबकि साजिश से जुड़ी धारा 29 के तहत तीन साल का कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

लेखक के बारे में
Aditi Sharmaअदिति शर्मा
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