
छावनी बना तुर्कमान गेट, बाजार बंद, रात भर दहशत में रहे लोग.. पत्थरबाजी के बाद कैसे हालात?
तुर्कमान गेट में अतिक्रमण की कार्रवाई के बाद तनाव का माहौल है, जहां बाजार पूरी तरह बंद रहे और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। स्थानीय लोग रात भर दहशत में रहे और कई रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया।
सैयद फैज इलाही मस्जिद के पास मंगलवार देर रात अतिक्रमण पर कार्रवाई से पहले पुलिस अधिकारियों और इलाके के बड़े-बुजुर्ग स्थानीय लोगों ने भीड़ को हटने और गली में इकट्ठा नहीं होने की अपील की। इसी दौरान अचानक इलाके में अफरातफरी मची गई।
बाजार रहा बंद
घटना के बाद तुर्कमान गेट की गलियों में ईंट-पत्थर बिखरे हैं। बुधवार को बाजार पूरी तरह बंद रहा। स्थानीय निवासी रातभर दहशत का माहौल है। पूरे इलाके में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात हैं। स्थानीय निवासी फैजल अली ने बताया कि वह शाम छह बजे घर आए और चाचा की दुकान गए। पुलिसकर्मी दुकान बंद करने के लिए कहने लगे।
रात 10 बजे तक भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच चुका था। अफवाह फैल गई कि मस्जिद को गिराया जा रहा है, जिसके चलते लोग इकट्ठा होने लगे। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करीब तीन-चार घंटे चली।
गलियों में सुरक्षाकर्मियों का पहरा
फाटक तैलियान, मोहल्ला कब्रिस्तान और चितली कब्र इलाके की गलियों को बंद कर दिया गया, जिससे लोगों को जरूरी कार्य के लिए निकलने में कठिनाई हुई। बीमार लोगों को भी मुख्य सड़क तक पहुंचने में परेशानी हुई। बैरिकेडिंग और बंद रास्तों के कारण स्थानीय लोग अपने घरों और कार्यस्थलों तक पहुंच नहीं पाए।
कई मस्जिदों में नहीं पढ़ी गई नमाज
पत्थरबाजी की घटना के बाद इलाके की कुछ मस्जिदों में बुधवार को नमाज नहीं पढ़ी गई, जिनमें बड़ी मस्जिद और काली मस्जिद शामिल हैं। तुर्कमान गेट और चितली कब्र इलाके की करीब 1500 से 2000 दुकानें बंद रहीं। शाम को कुछ जरूरी दुकानें खुली, लेकिन कारोबार पर भारी असर पड़ा। इलाके के लोग इस घटना से गहरी निराशा और डर का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी शाहरुख ने बताया कि पूरा इलाका रात 11 बजे के करीब छावनी में तब्दील हो गया था। मुझे ऑफिस के काम के चलते बाहर जाना था, लेकिन पुलिस जाने से रोक रही थी। घर वाले भी बाहर जाने से बार-बार मना कर रहे थे। मैं जब गली तक पहुंचा तो तुर्कमान गेट के पास भीड़ एकत्रित होने लगी थी। मैं यह देखकर घबरा गया था।
स्थानीय निवासी शदाब खान ने बताया कि घटना से कुछ समय पहले ही मैं घर पहुंचा था। परिवार के लोग बुलडोजर की कार्रवाई की बात कर रहे थे। सभी डरे हुए थे। घर के आसपास काफी तनावपूर्ण माहौल था। पुलिसकर्मी लोगों से घरों के अंदर जाने की अपील कर रहे थे। दूरी ओर भीड़ पत्थर फेंक रही थी। मैं मंगलवार देर रात से सो नहीं पाया।





