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जहां सूफी संतों ने सिखाया भाईचारा, वहीं पत्थरबाजी ने किया शर्मसार; याद आया 1976 का काला दौर

जहां सूफी संतों ने सिखाया भाईचारा, वहीं पत्थरबाजी ने किया शर्मसार; याद आया 1976 का काला दौर

संक्षेप:

सूफी संत हजरत शाह तुर्कमान की विरासत वाले तुर्कमान गेट इलाके में हुई पत्थरबाजी ने साझा संस्कृति को चोट पहुंचाई है, जिसने स्थानीय लोगों को 1976 के आपातकाल के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई की याद दिला दी।

Jan 08, 2026 06:38 am ISTAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, अभिनव उपाध्याय। नई दिल्ली
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पुरानी दिल्ली इलाके में सोमवार देर रात हुई पत्थरबाजी की घटना ने न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र की साझा विरासत को भी चोट पहुंचाई है। यह वही जमीन है जहां सदियों पहले सूफी संतों ने धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर इंसानियत, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।

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सूफी संत के नाम पर है इसका नाम

शाहजहांनाबाद के 14 दरवाजों में से तुर्कमान गेट का विशेष महत्व है। इसे प्रसिद्ध सूफी संत हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी के नाम पर रखा गया। हजरत शाह तुर्कमान का संदेश था कि इंसान का सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है। उनकी दरगाह आज भी श्रद्धालुओं को जोड़ती है और हर साल देश-विदेश से हजारों लोग यहां मत्था टेकने आते हैं।

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सैयद फैज इलाही मस्जिद का भी खास महत्व

तुर्कमान गेट के पास स्थित सैयद फैज इलाही मस्जिद भी इस साझा विरासत की अहम कड़ी है। लगभग 250 वर्ष पुरानी यह मस्जिद चिश्तिया सिलसिले के प्रमुख सूफी संत हजरत शाह फैज-ए-इलाही द्वारा बनवाई गई थी। चिश्तिया परंपरा का मूल विचार है कि ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता प्रेम, सेवा और सहिष्णुता से होकर जाता है। पुराने समय में इस इलाके में हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदाय के लोग मिलजुल कर रहते और सूफी दरगाहों पर एक साथ चादर चढ़ाते थे।

पुरानी दिल्ली निवासी और इतिहासकार फिरोज बख्त अहमद कहते हैं कि इस स्थान पर पत्थरबाजी दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका मानना है कि विवाद का समाधान बातचीत और आपसी समझ से ही निकलेगा।

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इस इलाके में 1976 में भी कार्रवाई हुई थी

तुर्कमान गेट पर 50 वर्ष पहले अप्रैल 1976 में आपातकाल के समय भी बुल्डोजर चला था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, उस समय तुर्कमान गेट के आस-पास घरों और दुकानों को निशाना बनाया था। कार्रवाई का उस दौरान स्थानीय लोगों ने खूब विरोध किया था। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि 1976 में तुर्कमान गेट पर स्थित घरों व दुकानों पर बुलडोजर चलने की कार्रवाई के दौरान पुलिस से झड़प में पांच से अधिक लोगों को मौतें भी हुई थी। जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। बाद में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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