
फिर तुर्कमान गेट पहुंचे बुलडोजर, मलबा हटाया; 6 और अरेस्ट; रडार पर 10 इन्फ्लुएंसर
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एमसीडी के अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा मामले में पुलिस ने छह और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 10 ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों की पहचान की है जिन्होंने मस्जिद गिराए जाने की झूठी अफवाह फैलाई थी।
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एमसीडी के अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा मामले में पुलिस ने छह और लोगों को गिरफ्तार किया है जिससे कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11 हो गई है। पुलिस ने 10 ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों की पहचान की है जिन्होंने मस्जिद गिराए जाने की झूठी अफवाह फैलाई थी। जांच में सामने आया कि व्हाट्सएप ग्रुप्स और वॉयस नोट्स के जरिए गलत सूचना फैलाकर भीड़ इकट्ठा की गई और पत्थरबाजी हुई। इस बीच गुरुवार रात को एकबार फिर बुलडोजर मौके पर पहुंचे और मलबे को हटाने का काम किया।
छह और गिरफ्तार
अधिकारियों ने बताया कि तुर्कमान गेट पर हुई हिंसा के मामले में छह और लोगों को गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (मध्य) निधिन वलसन ने बताया कि छह आरोपियों की पहचान अफान, आदिल, शाहनवाज, हमजा, अथर और उबेद के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी तुर्कमान गेट इलाके के रहने वाले हैं।
5 को 13 दिन की न्यायिक हिरासत
इन नई गिरफ्तारियों के बाद पथराव और बवाल के मामले में अब तक पकड़े गए लोगों की कुल संख्या 11 हो गई है जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। इस बीच दिल्ली की एक अदालत ने गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से 5 को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जुमे की नमाज के दौरान तैनात रहेगी फोर्स
सूत्रों ने बताया कि कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान अतिरिक्त बल तैनात किया जाएगा। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों तैनात किए गए हैं।
जांच में रडार पर 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने उन 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों की पहचान की है जिन्होंने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर झूठे दावे किए थे। पुलिस ने भ्रामक मैसेज फैलाने के आरोप में कई व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच शुरू कर दी है।
महिला इन्फ्लुएंसर को बुलाया
पुलिस ने अफवाह फैलाने के सिलसिले में एक महिला इन्फ्लुएंसर को पूछताछ के लिए बुलाया गया है क्योंकि उनके वीडियो को पुलिस ने भ्रामक और आपसी भाईचारा बिगाड़ने वाला पाया है।
सोशल मीडिया के जरिए फैलाई अफवाह
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात को मस्जिद के पास चले अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई गई। इन्हीं गलत सूचनाओं के कारण वहां पत्थरबाजी की घटना हुई। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में यह झूठी खबर फैलाई गई कि एमसीडी मस्जिद को गिरा रही है जिससे वहां 200 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई।
व्हाट्सएप ग्रुपों पर रखी नजर
अधिकारियों ने बताया कि भड़काऊ संदेशों वाले चार से पांच व्हाट्सएप ग्रुपों पर कड़ी नजर रखी गई। हालांकि हिंसा से तुरंत पहले कोई नया ग्रुप नहीं बना था। पुलिस टीम पहले ही इनमें से कई व्हाट्सऐप ग्रुपों में शामिल हो गई थी और वहां फैल रही झूठी अफवाहों का तुरंत खंडन किया। पुलिस की इस सक्रियता की वजह से ही मौके पर बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठा नहीं होने पाई।
सपा नेता को नोटिस भेजने की तैयारी
पुलिस समाजवादी पार्टी के नेता मोहिबुल्लाह नदवी को भी जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है जो कथित तौर पर मौके पर मौजूद थे। दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा ने पहले कहा था कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि नदवी वहां मौजूद थे लेकिन जब तक तोड़फोड़ शुरू हुई तब तक वह चले गए थे। इसकी जांच की जा रही है।
घटनास्थल पर छानबीन
इस बीच बवाल में शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयासों के तहत जांचकर्ताओं ने घटनास्थल का सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया, सैंपल लिए और नुकसान का दस्तावेजीकरण किया।
पहले ही ऐक्टिव हो गई थी पुलिस
अधिकारियों ने बताया कि एसीपी और एसएचओ ने घटना से काफी पहले ही अमन समिति के सदस्यों, बुजुर्गों और धार्मिक नेताओं से मुलाकात की थी। उन्हें बताया गया था कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
पुलिस ने बताया था कि मस्जिद नहीं गिराई जाएगी
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (मध्य) निधिन वलसन ने बताया कि उन्होंने अभियान शुरू होने से कुछ दिन पहले 120 से अधिक मौलवियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी और उन्हें समझाया था कि केवल अवैध अतिक्रमण ही हटाए जाएंगे और मस्जिद को नहीं गिराया जायेगा। धार्मिक नेताओं को अदालत के आदेश को चुनौती देने के कानूनी विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी गई थी।
गुरुवार को भी मौके पर पहुंचे बुलडोजर
इस बीच गुरुवार को भी कुछ अतिक्रमित हिस्सों को ध्वस्त करने का काम जारी रहा और नगर निगम के कर्मचारियों ने बुलडोजर लगाकर रात तक घटनास्थल से मलबा हटाया। एमसीडी के अधिकारियों ने पहले बताया था कि एक नैदानिक केंद्र, एक बारात घर और चारदीवारी सहित लगभग 36,000 वर्ग फुट अतिक्रमित क्षेत्र को खाली करा लिया गया है जबकि मस्जिद को छुआ तक नहीं गया है।
मस्जिद को छुआ तक नहीं गया
पुलिस ने तोड़फोड़ स्थल की हवाई फुटेज साझा करते हुए कहा कि ऑपरेशन से पहले और बाद में ली गई वीडियो से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि मस्जिद को छुआ तक नहीं गया था। वलसन ने कहा कि अदालत का आदेश केवल बारातघर और नैदानिक केंद्र को ध्वस्त करने का था। अतिक्रमण हटाने के अभियान के बाद की वीडियो में मस्जिद पूरी तरह से खड़ी दिखाई दे रही है जबकि बाकी अतिक्रमित क्षेत्र को खाली करा लिया गया है।
अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी
हिंसा में स्थानीय थाना अधिकारी सहित कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जब पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी गईं। इलाज के बाद पुलिसकर्मी ड्यूटी पर लौट आए हैं। पुलिस ने कहा कि आगे की जांच जारी है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि गलत सूचना फैलाने या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।





