
‘अगर तुम रोईं, तो मैं भी रो दूंगी’: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तारा वितास्ता गंजू ने किससे कही यह बात
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को उस वक्त भावुक करने वाले पल देखने को मिले जब जस्टिस तारा वितास्ता गंजू अपनी विदाई भाषण के दौरान अपनी बेटी को रोते हुए देखकर खुद भी रो पड़ीं।
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को उस वक्त भावुक करने वाले पल देखने को मिले जब जस्टिस तारा वितास्ता गंजू अपनी विदाई भाषण के दौरान अपनी बेटी को रोते हुए देखकर खुद भी रो पड़ीं। जस्टिस गंजू ने अपने विदाई भाषण के दौरान जब यह देखा कि उनकी बेटी रो रही है। इस पर उन्होंने बेटी को दिलासा देने के लिए मुस्कुराते हुए कहा, “अगर तुम रोओगी, तो मैं भी रो दूंगी।” जस्टिस गंजू ने कहा कि अचानक हुई घटनाओं के चलते उनका पूरा परिवार फेयरवेल में शामिल नहीं हो पाया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस गंजू ने अपने विदाई भाषण में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कानून और न्याय के बारे में उनकी समझ को आकार दिया है। हालांकि कई बार देर रात तक काम करने के चलते उन्हें आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि देर रात तक या वीकेंड पर काम करने से कभी-कभी आलोचना या गलतफहमी हुई है, फिर भी मैंने कभी भी मेहनत को गलती नहीं माना। न्याय की जरूरतें हमेशा घड़ी के हिसाब से नहीं चलतीं और हमारी सबसे पहली ड्यूटी देश और उन लोगों के प्रति होनी चाहिए जो हमसे मदद मांगते हैं। निजी आराम या नाराजगी का डर भी न्याय के प्रति हमारी जिम्मेदारी से ज्यादा जरूरी नहीं हो सकता।
उन्होंने आगे कहा कि सच कहूं तो, इस कोर्ट ने मुझे कानून, निष्पक्षता और गहरी जिम्मेदारी के बारे में वह सब कुछ सिखाया है, जो मैं जानती हूं। यह मेरा सबसे बड़ा गुरु रहा है। यहां बिताए गए साल मेरी न्यायिक यात्रा के सबसे संतोषजनक सालों में से रहे हैं - एक ऐसी यात्रा जिसे मैं इसी भावना और इसी लगन के साथ जारी रखने की उम्मीद करती हूं।
जस्टिस गंजू का कर्नाटक हाईकोर्ट में ट्रांसफर
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस साल अगस्त में दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों जस्टिस तारा वितास्ता गंजू और जस्टिस अरुण मोंगा के ट्रांसफर की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को इन जजों के कर्नाटक और राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर का नोटिफिकेशन जारी किया है।
बार एसोसिएशन ने किया था ट्रांसफर का विरोध
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने जस्टिस गंजू के ट्रांसफर का कड़ा विरोध किया था। इतना ही नहीं, महिला वकीलों के साथ ही बार के कई अन्य सदस्यों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई को पत्र लिखकर जस्टिस गांजू के ट्रांसफर का विरोध किया था।





