दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर टोल टैक्स लगाने की तैयारी, ऐसा करने पर 300 रुपए तक बचेंगे
दिल्ली-देहरादून हाईवे पर टोल टैक्स लगाने की तैयारी जोरों से चल रही है। योजना के मुताबिक, एक दिन में दिल्ली से देहरादून आने-जाने में कम टोल लगेगा। एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो माह के भीतर टोल व्यवस्था लागू हो जाएगी।

दिल्ली-देहरादून हाईवे पर टोल टैक्स लगाने की तैयारी जोरों से चल रही है। योजना के मुताबिक, एक दिन में दिल्ली से देहरादून आने-जाने में कम टोल लगेगा। अभी एक तरफ के 675 रुपये लग रहे हैं। जाते समय दोनों तरफ के टोले के पैसे देने पर 1010 रुपये ही लगेंगे। ऐसे में तीन सौ रुपये से ज्यादा की बचत होगी।
एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो माह के भीतर टोल व्यवस्था लागू हो जाएगी। शुरुआती दौर में तीन माह के लिए एजेंसी को टोल टैक्स वसूली के लिए नियुक्त किया जाएगा। फिर लंबे वक्त के लिए दूसरी एजेंसी को यह जिम्मा सौंपा जाएगा।
लागत 13 वर्षों में पूरी होगी
भारतमाला परियोजना के तहत बने इस हाईवे को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भी नाम दिया गया है। यह करीब 213 किलोमीटर का है। इसके निर्माण में करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। एनएचएआई का अनुमान है कि इस हाईवे के टोल टैक्स से सालाना करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी। इस लिहाज से करीब 13 वर्षों में हाईवे की लागत टोल टैक्स से वसूल हो जाएगी।
कार से होगी ज्यादा आय
एनएचएआई की माने तो दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 71 प्रतिशत कारें दौड़ेंगी। ऐसे में कार चालकों से आय अधिक प्राप्त होगी। निर्माण में इस्तेमाल होने वाले भारी वाहन व मल्टी एक्सेल वाहनों से 11 प्रतिशत, बस व ट्रक से 11 प्रतिशत, तीन एक्सेल कॉमर्शियल वाहनों से चार प्रतिशत और हल्के कॉमिर्शयल वाहनों व मिनी बस से तीन प्रतिशत आय का अनुमान है।
कार से यात्रा का निर्धारित हुआ टोल टैक्स
एक तरफ और दोनों ओर का एक साथ
दिल्ली से काठा - 235 रुपये - 350 रुपये
दिल्ली से रसूलपुर (सहारनपुर)- 420 रुपये - 630 रुपये
दिल्ली से सैयद माजरा (सहारनपुर) - 530 रुपये - 790 रुपये
दिल्ली से देहरादून- 675 रुपये - 1010 रुपये
(दोनों ओर का टोल टैक्स जाते वक्त एक बार में अदा करना होगा)
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


