नोएडा में नाले में गिरकर एक और इंजीनियर की मौत, इकलौते बेटे के लिए बहू ढूंढ रही थी मां

हिन्दुस्तान, नोएडा
Follow us on Google News
share

नोएडा में नाले में डूबने से एक और इंजीनियर की मौत हो गई। वह अपने घर का इकलौता चिराग था। मां उसके लिए रिश्ते तलाश रही थी। प्राधिकरण के अधिकारियों का दावा है कि युवक की मौत नाले के किनारे बिजली के खंभे से उतरे करंट के चलते हुई। वहीं, विद्युत निगम ने करंट की बात से इनकार किया है।

noida engineer death

नोएडा में करीब 6 महीने पहले हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद भी विभाग नहीं चेते। इसके कारण एक और घर का चिराग बुझ गया। सेक्टर-58 में गुरुवार सुबह बारिश के दौरान खुले नाले में गिरकर इंजीनियर की मौत हो गई। प्राधिकरण के अधिकारियों का दावा है कि युवक की मौत नाले के किनारे बिजली के खंभे से उतरे करंट के चलते हुई, जबकि विद्युत निगम ने करंट लगने की बात से इनकार किया है।

दोस्त के साथ जाता था कंपनी

पुलिस के मुताबिक फर्रुखाबाद निवासी 27 साल का आर्यन सेक्टर-22 स्थित चौड़ा रघुनाथपुर गांव के किराये के घर में रहता था। वह सेक्टर-58 में इन्वर्टर बनाने वाली कंपनी में पिछले तीन साल से सुपरवाइजर था। हाल ही में उसने इलेक्ट्रिक ब्रांच से बीटेक किया था। आर्यन रोजाना घर से दोस्त शुभम के साथ कंपनी में जाता था।

नाले के ऊपर रखे स्लैब गायब थे

आर्यन गुरुवार सुबह करीब नौ बजे कंपनी के लिए निकला था। सेक्टर-22 से ऑटो में बैठकर सेक्टर-58 के ए ब्लॉक के पास उतरा। वहां से वह अपने दोस्त शुभम के साथ पैदल ही कंपनी जा रहा था। बारिश का पानी सड़क पर भरा हुआ था। आर्यन सड़क पर भरे पानी से बचने के लिए हरित पट्टी के किनारे बने नाले की पटरी पर चलने लगा। कुछ दूर चला तो नाले के ऊपर रखे स्लैब गायब थे। वह अचानक फिसलकर नाले में गिर गया। नाले में करीब दो से ढाई फीट पानी भरा था।

लोगों को पानी में करंट महसूस हुआ

नाले में गिरने के बाद वह उठ नहीं पाया और बचाने की गुहार लगाने लगा। दोस्त शुभम उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा तो उसे करंट महसूस हुआ। वहां से गुजर रहे कुछ लोग उसे बचाने के लिए आगे बढ़े तो उन्हें पानी में करंट महसूस हुआ। वे पीछे लौट गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस स्थान पर आर्यन नाले में गिरा, उसकी गहराई इतनी नहीं कि वह डूब जाए। वहां 11 हजार वोल्ट का विद्युत पोल भी है, जहां से करंट पानी में फैला हुआ था।

पुलिस ने नाले से बाहर निकाला

सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह आर्यन को बाहर निकाला और सीपीआर देने के बाद जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। इसलिए विसरा सुरक्षित किया गया है।

मां का इकलौता सहारा था आर्यन

आर्यन की मौत के बाद रानी देवी के जीवन में दुख का पहाड़ टूट गया। चाचा अनमोल ने बताया कि आर्यन के पिता संजय कुमार पेशे से कंपाउंडर थे। कैंसर से चार वर्ष पहले संजय की मौत हो गई थी। आर्यन घर का इकलौता चिराग था। रानी देवी आर्यन की शादी के लिए रिश्ते खोज रही थीं।

हादसे के बाद विभागों ने एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ा

आर्यन की मौत के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगाकर पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन घटनास्थल दोनों विभागों की लापरवाही उजागर कर रहा है। जिस नाले में गिरने से आर्यन की जान गई, वहां नाले के ऊपर न तो स्लैब थे और न ही किसी अन्य चीज से ढका गया था। विद्युत निगम हर साल खंभों के निचले हिस्से को काले रंग की मोटी परत की पॉलीथिन से ढक देता है, ताकि खंभे में करंट उतरे तो कोई जनहानि न हो। इसके लिए विभाग को बजट भी मिलता है। इसके बावजूद विभाग ने घटनास्थल पर लगे खंभे से पॉलीथिन को नहीं बांधा।

युवराज की मौत से नहीं लिया सबक

नोएडा के सेक्टर-150 में करीब छह माह पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की भी निर्माणाधीन भूखंड में भरे पानी में कार समेत गिरने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों ने शहर के खुले नालों को सुरक्षित करने और बारिश के दौरान विशेष निगरानी का दावा किया था। हालांकि, आर्यन की मौत ने उन दावों की हकीकत उजागर कर दी। लगातार दूसरी घटना के बाद शहर में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News , Faridabad News और दिल्ली में आज का मौसम सहित पूरे NCR की खबरें पढ़ने के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें। CJP Sansad March LIVE देखें और पाएं पल-पल की ताज़ा खबरें।