'तो उस दिन मेरी हत्या कर देते', दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर ने सुनाई रूह कंपा देने वाली घटना; क्या हुआ था
दिल्ली पुलिस के इंसपेक्टर नंद किशोर ने 20 जुलाई की रूह कंपा देने वाला अनुभव बताया है। नंद किशोर ने बताया कि उस दिन अगर वो बचकर ना निकलते तो भीड़ उनकी हत्या कर देती।

26 जुलाई को जंतर-मंतर पूरी तरह से खाली हो चुका है। इससे एक दिन पहले यहां लाखों की संख्या में लोग इकट्ठा थे। उससे पहले यहीं पर हिंसा भी हुई थी। इस हिंसा में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं और आंसू गैस के गोले दागे, ये एक सच है। एक सच ये भी है कि प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस के साथ हिंसा और पुलिसकर्मियों के सुरक्षाबलों को पीटा और उनके साथ हिंसा की। इस मामले में एक इंसपेक्टर का बयान सामने आया है। इंसपेक्टर ने बताया कि 20 जुलाई को उनपर हमला हुआ था। इंस्पेक्टर का कहना है कि अगर उस दिन वो वहां से निकल नहीं पाते, तो भीड़ पीट-पीटकर उनकी हत्या कर देती।
इंस्पेक्टर नंद किशोर ने क्या बताया
20 जुलाई को हुई हिंसा पर बात करते हुए इंस्पेक्टर नंद किशोर ने बताया कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के बाद अफरा-तफरी मच गई थी। उन्होंने कहा कि पथरवा करनेवालों ने उनपर हमला कर दिया था। नंद किशोर ने दावा किया कि, उस दिन अगर वो उस जगह से निकल नहीं पाते, तो भीड़ उनकी पीट-पीटकर हत्या कर देती। उन्होंने बताया कि भीड़ के हमले के दौरान वो बहुत डर गए थे और उन्हें लगा था कि अब उनकी हत्या कर दी जाएगी, लेकिन किसी तरह वो वहां से खुद को बचाकर बाहर निकल आए।
वीडियो देखकर बेटी परेशान
इस मामले पर बात करते हुए इंस्पेक्टर नंद किशोर ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों में अलग से मामला दर्ज करवाना चाहते हैं, ताकि उन पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को पर कार्रवाई की जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड ऐक्शन फोर्स और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के कई जवानों पर हमले किए गए हैं। नंद किशोर के अनुसार, इस घटना का उनके परिवार पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि उनकी बेटी ने सोशल मीडिया पर उन पर हमले का वीडियो देखा है, जो उनके लिए बेहद दुखद और परेशान करने वाला अनुभव है।


