करोड़ों की रंगदारी मांगने पर 3 दबोचे, आईबी का रिटायर्ड अफसर निकला गिरोह का सरगना

हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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गाजियाबाद पुलिस ने रंगदारी मांगने के आरोप में इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक पूर्व अधिकारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना 2022 में आईबी से संयुक्त उपनिदेशक के पद से रिटायर हुआ था। आरोपियों पर एक फर्म के मालिक से 15 करोड़ की रंगदारी मांगने और 55 लाख रुपए वसूलने का आरोप है। 

आईबी का रिटायर्ड अफसर निकला गिरोह का सरगना।
आईबी का रिटायर्ड अफसर निकला गिरोह का सरगना।

गाजियाबाद जिले की इंदिरापुरम पुलिस और स्वॉट टीम ने खुद को आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी बताकर करोड़ों की रंगदारी मांगने वाले और अवैध वसूली करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना अनिल प्रताप है, जो 2022 में आईबी से संयुक्त उपनिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुआ था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.92 लाख रुपये, तीन मोबाइल और एक डायरी बरामद की है। आरोपियों पर एक फर्म के मालिक से 15 करोड़ की रंगदारी मांगने और 55 लाख रुपये वसूलने का आरोप है। डीसीपी नगर धवल जायसवाल ने बताया कि पकड़े गए आरोपी ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित पंचशील हाईनेस सोसाइटी में रहने वाले 64 साल के अनिल प्रताप सिंह, दिल्ली के वसंतकुंज में रहने वाले 36 साल के अंकित द्विवेदी और दिल्ली के ही जेपी ब्लॉक पीतमपुरा में रहने वाले 34 साल के सिद्धार्थ जैन हैं, जबकि इनके गिरोह में शामिल अनिकेत उर्फ कबीर और सलमान अभी फरार हैं।

डीसीपी ने बताया कि एक सितंबर को इंदिरापुरम में रहने वाले उद्यमी विकास मित्तल ने थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने शिकायत देकर बताया था कि अनिल प्रताप सिंह, अनिकेत सिंह उर्फ कबीर सिंह, सिद्धार्थ जैन, सलमान और अंकित द्विवेदी खुद को आईबी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर 15 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं। हालांकि, दोनों के बीच पांच करोड़ रुपये पर सहमति बनी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उद्यमी से 55 लाख रुपये भी वसूल लिए। पुलिस ने फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने गिरोह के सरगना अनिल प्रताप सिंह समेत तीन गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य दो साथियों की तलाश जारी है। जल्द ही इन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

ऐसे की गई अवैध वसूली

पुलिस की मुताबिक शिकायतकर्ता विकास मित्तल की दिल्ली स्थित ए टू जेड फर्म को एनआईए/सीबीआई से संबंधित एक नोटिस मिला था। फर्म के मैनेजर योगेश ने अपने परिचित सलमान से इस नोटिस पर चर्चा की। सलमान ने उच्च अधिकारियों से जान-पहचान का दावा करते हुए मामला निपटाने की बात कही। फिर सलमान और सिद्धार्थ जैन के माध्यम से अनिल प्रताप सिंह ने योगेश से संपर्क किया। अनिल प्रताप सिंह ने खुद को आईबी का संयुक्त निदेशक बताकर नोटिस का निपटारा कराने के लिए 15 करोड़ रुपये की मांग की, न देने पर विकास मित्तल को जेल जाने और फर्म बर्बाद होने की धमकी दी थी। अनिल प्रताप सिंह ने योगेश के बाद फर्म के मालिक विकास मित्तल से भी संपर्क किया और रकम वसूली।

गिरोह में बेटा और दोस्त शामिल

डीसीपी ने बताया कि आरोपी ने गिरोह में अपने बेटे और दोस्त को शामिल किया। अनिल प्रताप सिंह ने उद्यमी विकास मित्तल से रंगदारी वसूलने के लिए उन्हें नोटिस पर जेल जाने की कार्रवाई का डर दिखाकर 55 लाख रुपये वसूल लिए थे। इस काम के लिए अनिल ने अपने बेटे अनिकेत उर्फ कबीर के साथ अंकित को रुपये लेने के लिए भेजा था। अभी अनिकेत और सलमान पुलिस की पकड़ से बाहर है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

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सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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