ग्रीन बेल्ट शहर के फेफड़े हैं, कूड़ाघर नहीं; ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को अतिक्रमण के लिए लगी फटकार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को फटकार लगाई है। ग्रीन बेल्ट को शहरी इलाकों के फेफड़े बताया गया है। इसमें कहा गया है कि पब्लिक ट्रस्ट के सिद्धांत के तहत उनकी सख्ती से रक्षा की जानी चाहिए।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी को तय ग्रीन बेल्ट से तुरंत अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। नोएडा अथॉरिटी को फटकार लगाते हुए कहा- ‘शहरी इलाकों के फेफड़े’ यानी ग्रीन बेल्ट की रक्षा की जानी चाहिए।
NGT के चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव, और एक्सपर्ट सदस्य ए सेंथिल वेल, सुधीर कुमार चतुर्वेदी और सुजीत कुमार बाजपेयी की बेंच एक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ग्रेटर नोएडा में ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण और उनके गलत इस्तेमाल को उजागर किया गया था।
28 अक्टूबर के एक आदेश में, ट्रिब्यूनल ने ग्रीन बेल्ट को "शहरी इलाकों के फेफड़े" बताया और कहा कि पब्लिक ट्रस्ट के सिद्धांत के तहत उनकी "सख्ती से रक्षा" की जानी चाहिए। इसने ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNIDA) को सभी ग्रीन बेल्ट की मरम्मत और रखरखाव करने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही साथ उन्हें अस्थायी और स्थायी निर्माण के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी।
NGT ने कहा, शहरी ग्रीन बेल्ट को अतिक्रमण या कचरा जमा करने के लिए कुर्बान नहीं किया जा सकता। इसने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि खुली जगहें और पार्क सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी हैं।
राजस्व अधिकारियों को तीन महीने के भीतर एक तय ग्रीन बेल्ट की सीमा तय करने का निर्देश देते हुए, ट्रिब्यूनल ने GNIDA से सीमा तय होने के बाद उस इलाके की बाड़ लगाने को कहा। NGT ने GNIDA को सभी ग्रीन बेल्ट की मरम्मत और रखरखाव करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि उनकी हरियाली विकसित और सुरक्षित रहे।


