मस्जिद, कब्रिस्तान और वक्फ बनाम MCD की लड़ाई; दिल्ली में हुए बुलडोजर एक्शन की कानूनी कहानी
मस्जिद कमेटी पहले ही कोर्ट के आदेश को चुनौती दे चुकी है। उनका कह है- ये एक वक्फ प्रॉपर्टी है इसलिए इसके फैसले का अधिकार सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है। जबकि एमसीडी का इस मामले में अलग दावा है। जानिए इस जमीन को लेकर हो रहे विवाद के पीछे की कानूनी कहानी।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी टीम रामलीला मैदान में मस्जिद के पास की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद 25-30 लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। मस्जिद कमेटी पहले ही कोर्ट के आदेश को चुनौती दे चुकी है। उनका कह है- ये एक वक्फ प्रॉपर्टी है इसलिए इसके फैसले का अधिकार सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है। जबकि एमसीडी का इस मामले में अलग दावा है। जानिए इस जमीन को लेकर हो रहे विवाद के पीछे की कानूनी कहानी।
दिल्ली HC ने अतिक्रमण हटाने का दिया आदेश
सबसे पहले बात हाईकोर्ट के ऑर्डर की। बीते नवंबर, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान में करीब 39000 sq ft एरिया से अतिक्रमण हटाने को कहा था। इसके बाद अधिकारियों ने सड़क, फुटपाथ, बैंक्वेट हॉल, पार्किंग एरिया और एक प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर समेत कब्ज़े हटाने का ऑर्डर जारी किया।
मस्जिद कमेटी ने कोर्ट के आदेश को दी चुनौती
ऑर्डर सामने आया तो लोगों ने इसका विरोध किया। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए एक पिटीशन फाइल कर दी। दावा किया कि जमीन एक नोटिफाइड वक्फ प्रॉपर्टी है। इसके आधार पर तर्क दिया गया कि वक्फ एक्ट के तहत ऐसे झगड़ों का फैसला करने का अधिकार सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है। इस मामले में दिल्ली नगर निगम ने अलग बात कही।
MCD बोला- पूरी जमीन वक्फ नहीं
MCD का दावा है कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, उसमें से सिर्फ 0.195 एकड़ जमीन 1940 में लीज पर दी गई थी। इसमें आस-पास की जमीन शामिल नहीं है, जिस पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। पिटीशन लगाने वालों का दावा है कि- वे जमीन इस्तेमाल करने के लिए वक्फ बोर्ड को लीज रेंट दे रहे हैं।
दावा- हमारी शिकायत कब्रिस्तान को लेकर
पिटीशनर ने दावा किया कि उन्हें कब्ज़े हटाने पर कोई एतराज़ नहीं है और कहा कि बैंक्वेट हॉल और क्लिनिक पहले ही बंद कर दिए गए हैं। उनकी एकमात्र शिकायत जमीन पर चल रहे कब्रिस्तान को लेकर है।
सबूत नहीं मिला, इसलिए ढांचा गिराया जाए
इधर MCD ने पिछले महीने नवंबर के कोर्ट के आदेश को देखते हुए ऐलान किया कि 0.195 एकड़ जमीन (जिसमें मस्जिद है) के बाहर के सभी स्ट्रक्चर गिराए जाएंगे। इसमें कहा गया कि उसे मस्जिद की मैनेजिंग कमिटी या दिल्ली वक्फ बोर्ड का जमीन पर कानूनी कब्जा साबित करने के लिए कोई डॉक्यूमेंट्री सबूत नहीं मिला है।
ढ़ाचा गिराने पहुंचे तो लोगों ने की पत्थरबाजी
आज सुबह, नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी गिराने की कार्रवाई के लिए 30 बुलडोज़र और 50 डंप ट्रक लेकर साइट पर पहुंचे। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि करीब 25-30 लोगों ने अधिकारियों के साथ गई पुलिस टीमों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। अधिकारी एक डिस्पेंसरी और एक बैंक्वेट हॉल को गिराने में कामयाब रहे, लेकिन झड़प में पांच पुलिस वाले घायल हो गए।

लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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