TCS सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित चौहान मर्डर केस में 10 साल बाद इंसाफ, CBI कोर्ट से 2 दोषियों को उम्रकैद
सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को बहुचर्चित अंकित चौहान हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद सुनाई। अदालत ने दोनों दोषी शशांक जादौन और मनोज कुमार पर क्रमश: 70 हजार और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को बहुचर्चित अंकित चौहान हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद सुनाई। अदालत ने दोनों दोषी शशांक जादौन और मनोज कुमार पर क्रमश: 70 हजार और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस मामले की सुनवाई करते हुए विशेष जज ज्योति क्लेर ने कहा कि अपराध का तरीका दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं आता। उम्रकैद सुनाते हुए जज ने कहा कि कोर्ट इस तथ्य को नजररअंदाज नहीं कर सकती कि अपराध दिनदहाड़े राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया गया था, जो निडरता और देश के कानून के प्रति घोर उपेक्षा को दर्शाता है।
जज ने कहा कि दोषी कम उम्र के हैं, जो निश्चित रूप से एक कमजोर करने वाला कारक है। हालांकि, पीड़ित की कम उम्र को भी नहीं भुलाया जा सकता, जिसने अपने वृद्ध माता-पिता और एक युवा विधवा को पीछे छोड़ दिया। अदालत पीड़ित परिवार द्वारा झेली गई पीड़ा को नजरअंदाज नहीं कर सकती। जज क्लेर ने कहा कि इस मामले में गंभीर परिस्थितियां निश्चित रूप से कम करने वाली परिस्थितियों से अधिक हैं।
टीसीएस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे अंकित : अंकित चौहान, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में कार्यरत एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। घटना के कुछ दिन पहले ही अंकित की शादी हुई थी।
जादौन ने जल्दी रुपये कमाने के लिए जुर्म का रास्ता चुना : शशांक जादौन ने अपनी प्रभावशाली योग्यता पर भरोसा करने के बजाय जल्दी रुपये कमाने के लिए अपराध का रास्ता चुना। जादौन के बारहवीं में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक आए थे। उसने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक की डिग्री भी हासिल की। इसके बाद वह रियल एस्टेट में लग गया, जहां उसे भारी नुकसान हुआ। उसने कथित तौर पर अपने दोस्त पवन कुमार, जो एक सह-आरोपी था और जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है, से कर्ज लिया था, लेकिन वह उसे चुका नहीं पाया।
मनोज कुमार ने नुकसान की भरपाई के लिए एक एसयूवी चुराकर उसे अपने दोस्त को बेचने का आइडिया दिया। वारदात के बाद जादौन दो साल से ज्यादा समय तक जांच एजेंसियों से बचता रहा। विशेष जज ज्योति क्लेर ने 20 सितंबर को उसे दोषी ठहराया था।
घटना की वह काली रात का मंजर: अपराध वाले दिन, मृतक अंकित चौहान अपनी नई फॉर्च्यूनर कार, जिस पर अस्थायी नंबर प्लेट लगी थी, में अपराध के एकमात्र गवाह गगन दुधोरिया के साथ नोएडा के सेक्टर 135 से घर लौट रहा था, तभी एक होंडा एकॉर्ड कार ने उसकी फॉर्च्यूनर कार को ओवरटेक करके रोक लिया। होंडा एकॉर्ड से दो लोग बाहर निकले और चौहान पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे कैलाश अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ‘मृत’ घोषित कर दिया गया।
कार की नंबर प्लेट से पकड़ में आया था जादौन
हत्या के बाद मामला उत्तर प्रदेश पुलिस से हटाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपा गया। जांच के दौरान सीबीआई अधिकारियों को यूपी-14एबी-2200 नंबर की एक होंडा एकॉर्ड कार मिली। चू्ंकि यह नंबर यूपी-14एबी-2300 जो अपराध स्थल पर पहचानी गई होंडा एकॉर्ड थी, के बहुत करीब था, इसलिए सीबीआई ने मालिक की पहचान करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए। अदालत ने कहा कि इससे सीबीआई शशांक जादौन तक पहुंची। शशांक को 1 जून, 2017 को गिरफ्तार किया गया। उसने सह-आरोपी मनोज कुमार उर्फ ठेकेदार उर्फ मिस्त्री के अपराध में शामिल होने का खुलासा किया। खुलासे के बाद आरोपी मनोज कुमार को 2 जून, 2017 को गिरफ्तार किया गया।
सजा दिलाने में लग गए 10 साल
● 13 अप्रैल 2015 को की गई थी वारदात
● 14 जून 2016 को सीबीआई ने केस दर्ज किया
● 1 जून 2017 को शशांक जादौन पकड़ा गया
● 2 जून 2017 को मनोज कुमार हुए गिरफ्तार
● 29 अगस्त 2017 को गाजियाबाद की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
● 02 अगस्त 2019 सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर
● 20 सितंबर 2025 को दोनों को दोषी ठहराया गया
● 13 अक्टूबर 2025 को उम्रकैद सुनाई गई





