'जनाक्रोश दबाने को फंसाया'; ताहिर हुसैन ने अंकित शर्मा मर्डर केस में हुई सजा को दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती
ताहिर हुसैन ने आईबी अफसर अंकित शर्मा मर्डर केस में अपनी सजा और उम्रकैद के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसकी अपील पर आने वाले हफ्ते में सुनवाई होने की संभावना है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 के दंगों के दौरान आईबी अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में दोषी ठहराए गए आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन ने अपनी सजा और उम्रकैद के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है। हाईकोर्ट ताहिर की अपील पर आने वाले हफ्ते में सुनवाई कर सकता है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन ने अपनी अपील में दलील दी है कि उसके खिलाफ जांच शुरू से ही पक्षपाती रही है और इसका मकसद जनता का गुस्सा शांत करने के लिए उन्हें फंसाना था।
ताहिर की अपील के मुताबिक, “एफआईआर की तारीख और समय असल घटना के बाद का दिखाया गया है। 6 मार्च 2020 तक अपीलकर्ता की किसी दूसरे मामले में गिरफ्तारी के बाद तक कोई ठोस जांच नहीं की गई। गवाहों को मनगढ़ंत तरीके से खड़ा किया गया। असली चश्मदीदों के बयानों में हेरफेर किया गया और असली दोषियों को सजा नहीं दिलाई गई।”
किन धाराओं में दोषी ठहराकर सुनाई गई थी सजा
दिल्ली दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में अंकित शर्मा की निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। उनका क्षत-विक्षत शव एक नाले से बरामद हुआ था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में 31 जुलाई को ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 153ए (शत्रुता को बढ़ावा देना), 149 (गैर कानूनी रूप से एकत्र होना), 355 के साथ पठित 149 (आपराधिक बल एवं हमला), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना) और 147 (दंगा करना) के तहत दोषी ठहराया था। कोर्ट ने 31 जुलाई को ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हत्या का यह मामला अंकित शर्मा के पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर से संबंधित है। निचली अदालत द्वारा से सजा सुनाए जाने के बाद मुस्तफाबाद विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले नेहरू विहार वार्ड से वार्ड से पार्षद रहे ताहिर हुसैन ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी।
दंगों में सैकड़ों लोग हुए थे घायल
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर हुए प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़कने के दौरान 53 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।
दंगों के दौरान ताहिर हुसैन के घर की छत पर मौजूद भीड़ का वीडियो वायरल होने के बाद उसकी काफी बदनामी हुई। उसके आवास के पास एक नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद हुआ था।
दंगों के सिलसिले में नाम आने और खासकर चांद बाग इलाके में आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में नाम सामने आने के कुछ ही दिनों बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को निष्कासित कर दिया था।
ताहिर पर क्या लगे थे आरोप
आरोप था कि उसके घर और छत का इस्तेमाल पत्थर, पेट्रोल बम और अन्य हथियार जमा करने के लिए किया गया था। दिल्ली पुलिस ने दंगों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में ताहिर हुसैन को नामजद किया और मार्च 2020 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
एआईएमआईएम के टिकट पर लड़ा विधानसभा चुनाव
ताहिर हुसैन 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले दिसंबर 2024 में जेल में रहते हुए ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) में शामिल हो गया था। एआईएमआईएम उम्मीदवार के रूप में उसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार के लिए ताहिर को 6 दिन की पैरोल मिली थी। ताहिर हुसैन को 33,000 से अधिक वोट मिले। यह इलाका दंगों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र था।
(भाषा के इनपुट के साथ)


