सावधान! ठीक होने के बाद दोबारा हो सकता है संक्रमण, स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्क रहें

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इन दिनों इन्फ्लुएंजा का संक्रमण फैला हुआ है। इसमें स्वाइन फ्लू के संक्रमण से लोग अधिक बीमार हो रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि स्वाइन फ्लू ठीक होने के बाद भी फ्लू का संक्रमण दोबारा हो सकता है। इसलिए गंभीर संक्रमण से पीड़ित होने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्क रहें।
स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्क रहें।

दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में इन दिनों इन्फ्लुएंजा का संक्रमण फैला हुआ है। इसमें एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के संक्रमण से लोग अधिक बीमार हो रहे हैं। कई को सांस की गंभीर बीमारी होने से भर्ती करने और ऑक्सीजन सपोर्ट की भी जरूरत पड़ रही है। राहत की बात है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले ज्यादातर गंभीर मरीज ठीक हो रहे हैं। इस बीच डॉक्टर बताते हैं कि स्वाइन फ्लू ठीक होने के बाद भी फ्लू का संक्रमण दोबारा हो सकता है। इसलिए गंभीर संक्रमण से पीड़ित होने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

आईएलबीएस अस्पताल के क्लीनिकल वायरोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. एकता गुप्ता ने बताया कि इन दिनों इन्फ्लुएंजा-ए के एच1एन1 के अलावा एच3एन2 और इन्फ्लुएंजा-बी का भी संक्रमण हो रहा है। ऐसे में एच1एन1 से संक्रमित व्यक्ति ठीक होने के बाद एच3एन2 या इन्फ्लुएंजा-बी के संक्रमण के कारण बीमार हो सकता है। इन्फ्लुएंजा के वायरस के जेनेटिक में हल्का बदलाव होते रहता है। इस वजह से एच1एन1 के संक्रमण से एक बार बीमार होने के बाद छह से आठ माह में दोबारा भी बीमार पड़ सकते हैं।

एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौरभ मित्तल ने बताया कि एच1एन1 का संक्रमण होने पर बुखार तीन से चार दिन में ज्यादातर लोगों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ लोगों में खांसी दो से तीन सप्ताह भी रहती है। अधिक दिनों तक और तेज खांसी होने पर इनहेलर या सीरप देने की जरूरत पड़ती है।

15.2 प्रतिशत मरीजों को पड़ी ऑक्सीजन की जरूरत

इंडियन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल वायरोलॉजी की ओर से हाल ही में इन्फ्लूएंजा के संक्रमण को लेकर वेबिनार आयोजित की गई। इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के एक विशेषज्ञ ने जून से अगस्त के बीच एच1एन1 से पीड़ित होने के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले 442 मरीजों के डाटा का विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि 15.2 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट और करीब दो प्रतिशत मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ी।

121 नए मामले मिले

दिल्ली में पिछले 24 घंटे में स्वाइन फ्लू के 121 मामले आए हैं। इसके अलावा यहां के अस्पतालों में 30 मामले बाहर के भी सामने आए हैं। इस वजह से दिल्ली में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल मामले बढ़कर 3582 हो चुके हैं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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