दिल्ली में फैल रहा स्वाइन फ्लू वायरल बुखार से कितना अलग, कैसे बचें और कब जाएं अस्पताल
दिल्ली में तेजी से बढ़ते स्वाइन फ्लू के मामलों ने मरीजों के साथ डॉक्टरों की भी चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड रिजर्व कर दिए गए हैं। हालांकि सभी मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होती।

देश में तेजी से बढ़ते स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले अब डराने लगे हैं। दिल्ली में 24 घंटे में स्वाइन फ्लू के 135 नए मामले आए हैं। दिल्ली में अब स्वाइन फ्लू के 1912 हो गए हैं। इससे पहले गुरुवार को इन्फ्लुएंजा के 155 नए मामले आए थे, जिसमें 114 स्वाइन फ्लू के थे। पिछले 24 घंटे में स्वाइन फ्लू के नए मामले अधिक रिपोर्ट हुए हैं।
दिल्ली में बुखार और स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों ने विशेष इंतजाम कर सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। डीडीयू अस्पताल में फीवर क्लीनिक शुरू करने के साथ 70 बेड का फीवर वार्ड बनाया गया है। वहीं, आइसोलेशन वार्ड में 8 बेड आरक्षित किए गए हैं। यमुनापार के जीटीबी अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के इलाज के लिए 10 बेड आरक्षित किए गए हैं।
डीडीयू अस्पताल के सीनियर डॉक्टर के मुताबिक, अधिकांश मरीजों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। मरीजों को पीसीएम, एंटी-एलर्जिक दवाएं, ओआरएस और जरूरत के अनुसार आईवी फ्लूइड दिया जा रहा है। खांसी के साथ बलगम की शिकायत वाले मरीजों को एंटीबायोटिक भी दी जा रही है। अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों में करीब 10 प्रतिशत बुखार से पीड़ित हैं। फोर्टिस, अपोलो सहित ज्यादातर बड़े निजी अस्पताल टेली कंसल्टेशन के जरिये घर में ही होम केयर की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
जीटीबी अस्पताल में 10 बेड की व्यवस्था
जीटीबी अस्पताल में स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए एक वार्ड में अलग से 10 बेड की व्यवस्था की गई है। अगर अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होगी तो स्वाइन फ्लू के मरीजों को इस वार्ड में रखकर इलाज किया जाएगा। हालांकि अभी मरीज ऐसे हैं जिन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
एलएनजेपी व सफदरजंग में भी आइसोलेशन वार्ड
जयप्रकाश लोकनायक अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में पहले से एक आईसोलेशन वार्ड मौजूद है, इसमें 10 बेड की सुविधा है। उन्होंने बताया कि बुखार के जो मरीज आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही। अस्पताल में पर्याप्त आवश्यक दवाएं, आईवी फ्लूइड, ओआरएस आदि की सुविधा उपलब्ध है।
वायरल फीवर से कितना अलग और खतरनाक?
दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। सामान्य मौसमी फ्लू जैसे दिखने वाले इस संक्रमण की समय पर पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसके प्रमुख लक्षणों को पहचानना और एहतियात बरतना ही इससे बचाव है।
बचने के लिए क्या करें
●भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें और बीमार व्यक्तियों के संपर्क से बचें।
●नियमित अंतराल पर हाथ को साबुन से धोएं, आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
●लक्षण दिखने पर पर्याप्त आराम करें; नारियल पानी, ओआरएस व गर्म सूप लें।
●एनुअल इन्फ्लुएंजा वैक्सीन संक्रमण की गंभीरता, जटिलताओं और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।
कब अस्पताल जाएं
● सांस लेने में गंभीर तकलीफ या सीने में लगातार भारीपन/दर्द।
● होंठों का रंग नीला पड़ना।
● 4-5 दिनों के बाद भी खांसी का लगातार बिगड़ना।
● सुस्ती, अत्यधिक भ्रम या बच्चों में पेशाब कम होना।
● 48 घंटे बाद भी दवाओं से बुखार न उतरना।
क्या दिल्ली तक सीमित है?
नहीं। दिल्ली के अलावा मुंबई, बेंगलुरु और केरल से भी मामले सामने आ रहे।
मौजूदा स्थिति क्या है?
दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-ए के कुल 2,392 मामलों में से 1912 H1N1 के दर्ज किए गए हैं। इसलिए चिंता बढ़ रही।
सामान्य बुखार से क्या अंतर
●दोनों में अचानक तेज बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, खांसी और थकान जैसे लक्षण होते हैं।
●सामान्य वायरल 2-3 दिनों में ठीक होने लगता है, जबकि एचवनएनवन में बुखार तेज रहता है और लक्षण बिगड़ते जाते हैं।
जांच कराने में मरीजों की जेब हो रही खाली
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर प्राइवेट लैब में भी जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। महंगी जांच के कारण मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। जहां सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच फ्री होती है, वहीं प्राइवेट लैब में एच1एन1 की जांच के लिए 4430 से लेकर 4799 रुपये तक लिए जा रहे हैं। लाल पैथ लैब में इस टेस्ट के लिए 4430 रुपये, अपोलो लैब में 4599 रुपये और मैक्स लैब में 4500 रुपये कीमत ली जा रही है।
अस्पतालों में एंटीवायरल दवाओं की कमी
दिल्ली के ज्यादातर अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ओसेल्टामिविर एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। दिल्ली राज्य स्वास्थ्य मिशन की वेबसाइट पर उपलब्ध दवाओं के स्टॉक की स्थिति के अनुसार, लोक नायक अस्पताल में ओसेल्टामिविर 75 एमजी की दवा 7500 टैबलेट उपलब्ध है। जीटीबी, डीडीयू, अंबेडकर अस्पताल सहित किसी अन्य अस्पताल में ये दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि ये दवा हर मरीज को देने की जरूरत नहीं होती।
डॉ. विनोद कुमार, निदेशक, जीटीबी अस्पताल, ''पांच से सात प्रतिशत मरीजों को गंभीर संक्रमण होने का जोखिम रहता है। ज्यादातर मरीजों का ओपीडी के स्तर पर ही इलाज होता है। अभी इतने मरीज नहीं आ रहे कि अस्पताल में अधिक बेड आरक्षित कर दिए जाएं।''


