स्वतंत्र भारद्वाज ने CJP के सहारे ही की बचने की कोशिश, अदालत में क्या दी ऐसी दलील
स्वतंत्र भारद्वाज ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के दौरान अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए यह दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान दर्ज सभी एफआईआर को रद्द कर दिया, सिलए उसका केस भी खत्म हो चुका है।

संजय आजाद नाम के दलित शख्स को पीटने की वजह से एसी-एसटी ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए स्वतंत्र भारद्वाज को सोमवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका रद्द कर दी। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान एक यूट्यूबर के पिता पर हमले के आरोप में गिरफ्तार किए गए भारद्वाज ने राहत पाने के लिए कई दलीलें दीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से 'सीजेपी को मिली जीत' का सहारा लेने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस के जवाब के बाद हाई कोर्ट ने स्वतंत्र का जेल में रहना सुनिश्चित कर दिया।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र डुडेजा की बेंच के सामने स्वतंत्र के वकील ने कहा कि उसकी एक दिन की हिरासत भी अवैध है। वहीं, दिल्ली पुलिस के वकील संजय लाओ ने कहा कि पुलिस रिमांड एक दिन के लिए दी गई थी और भारद्वाज को अगले दिन ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इस बीच अदालत ने मौखिक रूप से कहा, 'वह (भारद्वाज के वकील) कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एफआईआर रद्द की जा चुकी है। कृपया इसकी पुष्टि कीजिए कि इसे रद्द किया जा चुका है या नहीं। यदि इसे खत्म किया जा चुका है तो उसे अब हिरासत में क्यों रखा जाए?'
शिकायतकर्ता की तरफ से पेश हुईं वकील स्वाति खन्ना ने कहा कि यह एससी/एसटी ऐक्ट की एफआईआर है। इस बीच भारद्वाज के वकील ने कहा कि एफआईआर में सीजेपी प्रोटेस्ट का भी जिक्र है। उन्होंने अदालत के सामने यह भी दलील दी कि यह धारा तो बाद में जोड़ी गई। उन्होंने आगे दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को एफआईआर रद्द कर दिए थे। हालांकि, अदालत ने पाया कि भारद्वाज ने याचिका में यह बात नहीं कही है।
अदालत के सवाल पर पुलिस बोली- यह एफआईआर रद्द नहीं
अदालत ने याचिकाकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज के वकील से पूछा, 'यदि हमने नोटिस जारी भी कर दिया तो क्या जवाब दाखिल किया गया होता?' इस बीच लाओ ने कहा कि यह उन एफआईआर में शामिल नहीं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि भारद्वाज को शनिवार को पेश किया गया था जहां से उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया। रविवार को एक दिन की ज्यूडिशियल कस्टी में भेजा गया और फिर सोमवार को भी अदालत में पेश किया गया और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
स्वतंत्र भारद्वाज ने पिता के जरिए दायर की थी याचिका
अदालत ने कहा, 'हम यह समझने में असफल रहे कि कैसे यह याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट' के रूप में दायर की गई है। अदालत ने इस तरह भारद्वाज की याचिका रद्द कर दी। भारद्वाज ने पिता रंधीर कुमार झा के माध्यम से इस याचिका को दायर किया था। उनकी तरफ से वकील उमेश शर्मा ने चीफ जस्टिस के सामने उठाया था जिस पर उन्होंने तत्काल सुनवाई की अनुमति दी थी।


