CJP का समर्थन करने पहुंचा था स्वतंत्र भारद्वाज, फिर क्यों फोड़ने लगा सिर; अभिजीत दीपके को धमकी
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान एक शख्स का सिर फोड़ने का दावा करने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा है कि वह सीजेपी की मांगों से सहमत है और आंदोलन का समर्थन करने के लिए ही जंतर-मंतर पहुंचा था।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान एक व्यक्ति का सिर फाड़ने और दिल्ली पुलिस का डंडा चलाने का दावा करके सुर्खियों में आए स्वतंत्र भारद्वाज ने उसी इंटरव्यू में खुद को इस आंदोलन का समर्थक भी बताया। भारद्वाज ने कहा कि सीजेपी की तीनों मांगें एकदम ठीक थीं और वह पहले ही दिन से आंदोलन का साथ देने पहुंचा था। लेकिन बाद में कुछ बातों की वजह से वह इसके खिलाफ हो गया। भारद्वाज ने अब अभिजीत दीपके और सौरभ दास को धमकी भी दी है। उसने कहा, 'उमर खालिद, अभिजीत दीपके, सौरभ भारद्वाज या नेहा बोरा जिस भी प्रोटेस्ट में जाएंगे वहां हम स्वागत के लिए तैयार रहेंगे। इनका इलाज कर देंगे।'
खुद को गौरक्षक, मुस्लिम विरोधी और जातिगत आरक्षण के खिलाफ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने इंटरव्यू में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा,प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर की वापसी और नीट पेपर लीक की वजह से जान देने वाले स्टूडेंट्स के परिवार को मुआवजा देने की मांग एकदम जायज थी। भारद्वाज ने कहा कि वह शुरुआत में इस आंदोलन का समर्थक था और ऐसे ही इरादों के साथ जंतर-मंतर गया था। भारद्वाज ने कि जब वहां प्रेमानंद महाराज, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ और भी टीका-टिप्पणियां होने लगीं। भारद्वाज ने कहा, 'हम नहीं जा रहे थे सीजेपी प्रोटेस्ट में। हम पहले दिन गए, पता है क्यों छात्रों के लिए। क्योंकि उनकी मुद्दा और सीजेपी की तीनों मांगें सही थीं। जवाबदेही मांगना सही था। हम वहां गए लेकिन वहां उमर खालिद, केजरीवाल की पूरी स्ट्रैटजी, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, आरएसएस मुर्दाबाद... तब हमको वहां जाना पड़ा।'
एक सोशल मीडिया एंफ्लुएंशर लड़की के पिता को पीटने के आरोपी भारद्वाज ने कहा कि वह जंतर-मंतर पर था और उसने देखा कि अचानक एक शख्स कैमरा उसकी तरफ करके रिकॉर्डिंग करने लगा और कुछ आपत्तिजनक बातें कहीं। इसके बाद उसने कैमरा बंद करने को कहा था तो बहस हुई और इस दौरान वह डस्टबिन पर पैर पड़ने से गिर पड़ा। भारद्वाज ने कहा कि उसे लगा कि उसकी बेइज्जती हो गई है तो उसने उस सख्स के सिर पर वार किया। हाथ में पहने कड़े से चोट लगने की वजह से उसका सिर फट गया। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि उसे नहीं पता था कि वह उस इंफ्लुएंशर का पिता है, जो उसके खिलाफ कॉटेंट बनाती है।
हाथ में दिल्ली पुलिस का डंडा कैसे आया
स्वतंत्र भारद्वाज ने इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि वह जूता भी दिल्ली पुलिस का ही पहनता है। उसने खुद को एनसीसी से प्रशिक्षित बताते हुए माना कि जंतर-मंतर पर संसद चलो मार्च के दिन उसके हाथ में दिल्ली पुलिस का ही डंडा था। यह डंडा किसने उसे दिया, इसका खुलासा करने से बचते हुए कहा, 'डंडा कहां से आया वह छोड़ दीजिए। वह प्राइवेट चीज है। बस हम आपको इतना बताएंगे कि जब दिल्ली पुलिस के दो पुलिसवालों का वीडियो वायरल हुआ था था। उन दोनों को वांटेड कर दिया गया था। वह दोनों मेरे जानकार हैं। उनको लेकर कह दिया गया था कि जहां मिले मारो। वो पुलिसवाले हैं उनको सिविल में लाने का ऑर्डर ऊपर से मिला होगा। हर पुलिसवाला लाठीचार्ज कर रहा था वह भी कर रहे थे। उनको वांटेड करोगे तो हमको बुरा लगा। हमने यह लकड़ी अपने पर ले ली। हम डंडा लेकर पहुंचे और बोले कि वो पुलिसवाले नहीं रियल गुंडे हम लोग हैं। लाठीचार्ज हम किए थे, जो करना है करना।'


