
‘आज का ऑर्डर 11 अगस्त के जैसा ही है’; आवारा कुत्तों पर 'सुप्रीम' फैसले से रो पड़ीं SC की वकील
दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को लेकर आज आए सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश ने एक बार फिर डॉग लवर्स को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट की वकील और याचिकाकर्ता ननिता शर्मा ने इस फैसले के बाद रोते हुए कहा कि आज का आदेश 11 अगस्त के पिछले आदेश जैसा ही है।
दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को लेकर आज आए सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश ने एक बार फिर डॉग लवर्स को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट की वकील और याचिकाकर्ता ननिता शर्मा ने इस फैसले के बाद रोते हुए कहा कि आज का आदेश 11 अगस्त के पिछले आदेश जैसा ही है। कुत्तों को सरकारी संस्थानों, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप से हटाया जाएगा और दूसरी जगह ले जाया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल ऑफिसर भी अपॉइंट किया जाएगा कि हटाए गए कुत्ते इन संस्थानों में वापस न आएं।

ननिता शर्मा ने कहा कि मुझे अब भी उम्मीद है और मुझे भगवान के न्याय पर भरोसा है। ऐसे बेजुबान जानवरों के साथ ऐसा अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों के तहत कुत्तों को दूसरी जगह ले जाना मना है, लेकिन इसे काटने की घटनाओं से सही ठहराया गया है। आज जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। शेल्टर हाउस भी अच्छे से मेंटेन होने चाहिए। हम इस आदेश का सम्मान कर रहे हैं क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है।
#WATCH | Over SC order on stray dogs in Delhi-NCR, Supreme Court lawyer and petitioner Nanita Sharma says, "Today's order is similar to the previous order of August 11. Dogs will be removed from government Institutions, educational institutions, railway stations, and bus stops… pic.twitter.com/OFAYUxIpIw
— ANI (@ANI) November 7, 2025
आवारा कुत्तों पर आया नया ‘सुप्रीम’ आदेश
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल-कॉलेजों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों जैसे क्षेत्रों में आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने के मामलों में खतरनाक वृद्धि पर गौर करते हुए शुक्रवार को निर्देश दिया कि ऐसे कुत्तों को तय शेल्टर हाउसों में भेजा जाना चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की स्पेशल बेंच ने आवारा कुत्तों के मामले में कई निर्देश पारित किए। बेंच ने प्राधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि हाईवे और एक्सप्रेसवे से मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाना एवं उनका तय आश्रय स्थलों में स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए।
बेंच ने प्राधिकारियों को सरकारी एवं निजी शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों आदि के परिसरों में आवारा कुत्तों का प्रवेश रोकने का निर्देश दिया ताकि कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं को रोका जा सके। उसने निर्देश दिया कि ऐसे संस्थानों से हटाए गए आवारा कुत्तों को वापस उन्हीं स्थानों पर नहीं छोड़ा जाए। बेंच ने प्राधिकारियों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) सहित राजमार्गों के उन हिस्सों की पहचान करने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाने को कहा, जहां आवारा जानवर अक्सर पाए जाते हैं।
इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 13 जनवरी की तारीख निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 नवंबर को कहा था कि वह उन संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए अंतरिम दिशानिर्देश जारी करेगा, जहां कर्मचारी आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं और उन्हें प्रश्रय देते हैं। कोर्ट 28 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से विशेषकर बच्चों में रेबीज फैलने की बात कही गई थी।
(भाषा के इनपुट के साथ)





