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शरजील की करतूत खालिद पर भी सबूत; SC में पुलिस की दलील, जमानत पर फैसला सुरक्षित

शरजील की करतूत खालिद पर भी सबूत; SC में पुलिस की दलील, जमानत पर फैसला सुरक्षित

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगा मामले में UAPA के तहत दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम समेत 7 आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

Dec 10, 2025 05:07 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को UAPA के तहत दर्ज दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अपनी दलीलों में कहा कि शरजील इमाम की करतूत यानी उसका भाषण बाकी आरोपियों पर भी एक सबूत के तौर पर लागू होता है।

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जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने उक्त आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में कथित तौर पर लगाए गए टुकड़े-टुकड़े नारों से संबंधित 2016 की एक गैर संबंधित FIR पर भरोसा करने को लेकर सवाल किया। बेंच ने पूछा कि आप 2020 में हुए दंगों के लिए पुरानी FIR क्यों दिखा रहे हैं? इसका इससे क्या लेना-देना है?

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें रखीं। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि एक साजिशकर्ता की करतूत को दूसरों पर भी लागू किया जा सकता है। शरजील इमाम के भाषणों को उमर खालिद पर लागू किया जा सकता है। एएसजी ने आगे कहा कि शरजील इमाम की करतूत को दूसरों आरोपियों के खिलाफ सबूत के तौर पर माना जाएगा।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील और अन्य की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि दिल्ली दंगे अपने आप नहीं भड़के थे। यह भारत की संप्रभुता पर सुनियोजित हमला था।

दिल्ली पुलिस और अन्य की दलीलें सुनने के बाद सु्प्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों ने काफी देर तक बहस की। दोनों पक्षों की ओर से दलीलों के अनुरूप दस्तावेज पेश किए गए। इन्हें रिकॉर्ड पर लिया गया। अब वकीलों को सभी दस्तावेजों को एकसाथ जुटाकर कंपाइलेशन में जमा करना होगा। यह काम 18 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाए ताकि अदालत 19 दिसंबर को विंटर वेकेशन पहले फैसला दे सके।

इससे एक दिन पहले शरजील इमाम ने अपनी दलील में कहा था कि वह न तो हिंसा में शामिल था और ना ही उसकी इसमें कोई भूमिका थी। वह लगभग छह साल से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में है। उसके खिलाफ केवल कथित भड़काऊ भाषण के ही आरोप हैं। शरजील की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ दवे का कहना था कि भले ही शरजील की स्पीच में कड़वे शब्द थे लेकिन यह ऐसा भाषण नहीं है जो केवल एकतरफा हो।

दवे ने आगे यह भी कहा कि शरजील को 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था जबकि दिल्ली में दंगे फरवरी में हुए थे। शरजील तो दंगों से लगभग एक महीने पहले ही हिरासत में था। दिल्ली दंगों के संबंध में लगभग 750 FIR दर्ज की गईं जिनमें इमाम का नाम नहीं था। अब लगभग छह साल हिरासत में रहने के बाद शरजील जमानत मांग रहा है। खासकर तब जब वह उन मामलों में आरोपी नहीं है जहां दंगे हुए थे।

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बता दें कि दिल्ली पुलिस ने उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर 2020 के दंगों के कथित तौर पर मास्टरमाइंड होने के आरोप के साथ आतंकवाद विरोधी कानून गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली में 22 से 24 फरवरी 2020 के दौरान भड़के दंगों में 53 लोग मारे गए थे जबकि 700 से अधिक घायल हुए थे।

(पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ)

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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