
रिज में 473 पेड़ काटने की मांग; SC ने DDA को नहीं दी मंजूरी, सुना दी दो-टूक
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि वह डीडीए को दिल्ली रिज क्षेत्र में और पेड़ काटने की अनुमति तभी देगा जब पूरी तरह संतुष्ट हो जाएगा कि पेड़ लगाने और वनीकरण की बहाली से जुड़े उसके पिछले आदेशों का पालन किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली रिज क्षेत्र में 473 पेड़ों को काटने की मांग वाली डीडीए की याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया कि जब तक उसके पिछले आदेशों के तहत 1.65 लाख पेड़ लगाने और पर्यावरण सुधार का काम पूरा नहीं हो जाता तब तक कोई नया पेड़ नहीं काटने दिया जाएगा। चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि उनको कागज या एआई जनरेटेड फोटो वाले नहीं वरन जमीन पर असली जंगल चाहिए। अदालत अब अगली सुनवाई में डीडीए की ओर से पेश की जाने वाली साइट वार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
मांगी थी 473 पेड़ काटने की मंजूरी
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ डीडीए की ओर से दाखिल किए गए एक आवेदन पर सुनवाई कर रहा था। इस आवेदन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान (CAPFIMS) को जोड़ने वाली सड़क की चौड़ीकरण परियोजना के लिए 473 पेड़ काटने, 2.97 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग करने और 2,519 पौधों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी थी।
अनुमति तभी जब…
अदालत ने साफ कर दिया कि वह डीडीए को दिल्ली रिज क्षेत्र में अतिरिक्त पेड़ काटने की अनुमति तभी देगा जब वह पूरी तरह से संतुष्ट हो जाएगा कि वनीकरण की बहाली पर उसके पिछले निर्देशों का पालन किया गया है। बता दें कि दिल्ली के मैदानगढ़ी में स्थित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा और शैक्षिक परियोजना है। इसमें BSF, CRPF, CISF आदि जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों और उनके परिवारों को विशेष मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही नर्सिंग शिक्षा और पैरामेडिकल ट्रेनिंग प्रदान करती है।
हमारे आदेशों का पालन कहां है?
सीजेआई ने डीडीए से पूछा कि हमारे आदेशों का पालन कहां है? उन 1.65 लाख पेड़ और 18 इलाकों का क्या हुआ जिनका वादा किया गया था। हमें कागजों या फोटो में दिखने वाले नकली या एआई जनरेटेड जंगल नहीं चाहिए वरन जमीन पर असली पेड़ नजर आने चाहिए जिनकी जांच की जा सके। वहीं डीडीए के वकील ने बताया कि पेड़ लगाने के लिए 185 एकड़ जमीन मिल गई है। 18 साइटों पर पौधरोपण के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। 28 फरवरी तक इन जमीनों की बाउंड्री वॉल बन जाएंगी।
साइट-वार रिपोर्ट की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिन छोटे पौधों को हटाने की डीडीए बात कर रहा है, वे दरअसल उन पेड़ों की जगह लगाए गए थे जिन्हें डीडीए ने पहले बिना कोर्ट की अनुमति के काट दिया था। इस पर सीजेआई ने मजाक में कहा कि ये पौधे शायद कोर्ट की अवमानना के डर से लगाए गए थे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा है। कोर्ट अब 19 जनवरी को अगली सुनवाई करेगा, जिसमें वह साइट-वार रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।





