
कहां जाएंगी परेशान महिलाएं? दिल्ली महिला आयोग के ‘बंद’ होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के 'बंद' होने पर चिंता जताई। सर्वोच्च अदालत ने पूछा कि बताएं इस परिस्थिति में संकट में फंसी महिलाएं कहां जाएंगी? सुप्रीम कोर्ट ने और क्या बातें कही जानें…
सुप्रीम कोर्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि दिल्ली महिला आयोग (DCW) बंद हो गया है। ऐसे में परेशानियों में फंसी महिलाएं कहां जाएंगी? डीसीडब्ल्यू के पास अध्यक्ष नहीं हैं। उनके पास कर्मचारी नहीं हैं। सब कुछ अव्यवस्थित है। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से दिल्ली महिला आयोग को बंद किए जाने से रोकने को लेकर कुछ उपाय करने को कहा।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने हाल ही में आई एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से दिल्ली महिला आयोग को बंद होने से रोकने लेकर कुछ उपाय करने को कहा। अदालत ने कहा- यह बंद हो गया है। ऐसे में संकट में फंसी महिलाएं कहां जाएंगी? उनके पास अध्यक्ष नहीं हैं। उनके पास कर्मचारी नहीं हैं। सब कुछ अव्यवस्थित है।
सुप्रीम कोर्ट अदालत ने यह टिप्पणी बाल तस्करी के एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने कहा कि वह दिल्ली महिला आयोग के मुद्दे पर विचार करेंगी। ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए कई निर्देश दिए गए थे। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डीसीडब्ल्यू बंद हो गया है। नई दिल्ली के विकास भवन में स्थित महिला आयोग का कार्यालय जनवरी 2024 से लगभग बंद है क्योंकि इसका कोई अध्यक्ष नहीं है।
वहीं डीसीडब्ल्यू की वेबसाइट पर अध्यक्ष और सदस्य सचिव सहित 4 सदस्यों का पद रिक्त दिखाया गया है। डीसीडब्ल्यू महिलाओं को दुर्व्यवहार और शोषण को लेकर परामर्श देता है। साथ ही बचाव और कानूनी सहायता तक के मामलों को देखता है। आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, यह एक दीवानी अदालत की तरह काम करता है। इसका गठन महिलाओं के लिए प्रदान की गई सुरक्षा से संबंधित मामलों की पड़ताल करने के मकसद से किया गया है।





