धर्म संसद के खिलाफ SC में पहुंची याचिका, CJI बोले- पिटीशनर्स तुरंत सुनवाई के लिए भेजें ईमेल

By Praveen Sharma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली। भाषा

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में आयोजित होने वाली ‘धर्म संसद’ के खिलाफ याचिका दायर करने वाले कुछ पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सोमवार को कहा कि वे इसे तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए ईमेल भेजें।

धर्म संसद के खिलाफ SC में पहुंची याचिका, CJI बोले- पिटीशनर्स तुरंत सुनवाई के लिए भेजें ईमेल

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में आयोजित होने वाली ‘धर्म संसद’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले कुछ पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सोमवार को कहा कि वे इसे तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए ईमेल भेजें। याचिका में ‘मुसलमानों के नरसंहार’ का आह्वान किए जाने का आरोप लगाया गया है।

याचिका दायर करने वाले कुछ पूर्व नौकरशाहों की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच से कहा कि याचिका को तत्काल सूचीबद्ध किए जाने की आवश्यकता है। चीफ जस्टिस खन्ना ने कहा, ‘‘मैं इस पर विचार करूंगा। कृपया ई-मेल भेजें।’’

भूषण ने कहा कि मुसलमानों के नरसंहार का सार्वजनिक तौर पर आह्वान किया गया है और इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि 'धर्म संसद' मंगलवार से शुरू होगी।

मंगलवार से शनिवार तक होनी है धर्म संसद

‘यति नरसिंहानंद फाउंडेशन’ द्वारा ‘धर्म संसद’ का आयोजन गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति मंदिर परिसर में मंगलवार से शनिवार तक होना है।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी सक्षम और उपयुक्त प्राधिकारियों को सांप्रदायिक गतिविधियों और घृणास्पद भाषणों में लिप्त व्यक्तियों या समूहों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। कार्यकर्ताओं और पूर्व नौकरशाहों ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की ‘जानबूझकर अवमानना’ करने का आरोप लगाते हुए गाजियाबाद जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ एक अवमानना ​​याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ताओं में कार्यकर्ता अरुणा रॉय, रिटायर्ड आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी अशोक कुमार शर्मा, पूर्व आईएफएस अधिकारियों देब मुखर्जी एवं नवरेखा शर्मा तथा अन्य शामिल हैं।

उत्तराखंड के हरिद्वार में इससे पहले आयोजित ‘धर्म संसद’ में कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण दिए जाने के कारण विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले में यति नरसिंहानंद और अन्य सहित कई लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया गया।  

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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