
अकाली दल प्रमुख ने विजेंद्र गुप्ता को लिखी चिट्ठी, आतिशी के खिलाफ ऐक्शन लेने का अनुरोध किया
शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने अपने पत्र में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता से कहा कि आतिशी की टिप्पणियों से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
एक तरफ जहां पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली विधानसभा के वीडियो को लेकर आतिशी को क्लीन चिट दे दी है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को एक पत्र लिखा है और विपक्ष की नेता आतिशी के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। इस दौरान बादल ने आतिशी को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने और गुरु साहब के खिलाफ़ ईशनिंदा वाली टिप्पणियां करने के लिए उनके खिलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश करने का आग्रह किया है। बादल ने अपने पत्र में कहा कि इन टिप्पणियों से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
बादल ने गुप्ता को लिखा अपना पत्र सोशल मीडिया पर शेयर किया और बताया कि, 'मैंने दिल्ली विधानसभा के माननीय स्पीकर श्री विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखकर उनसे अपील की है कि वे विपक्ष की नेता आतिशी को विधानसभा से अयोग्य घोषित करें और गुरु साहिबान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए उनके खिलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफ़ारिश करें, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।'
पत्र के जरिए लगाया आतिशी पर आरोप
अपने पत्र में बादल ने लिखा, 'जैसा कि आप जानते हैं, दिल्ली विधानसभा की सदस्य सुश्री आतिशी ने पूजनीय सिख गुरु साहिबान के खिलाफ अपमानजनक और अपवित्र टिप्पणी की है। इन टिप्पणियों से दुनिया भर के धर्मनिष्ठ, बहादुर और देशभक्त सिखों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। ऐसे में मैं आपके पास शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और एक धर्मनिष्ठ सिख के तौर पर अनुरोध करता हूं, जो सार्वभौमिक रूप से पूजनीय सिख गुरु साहिबान के खिलाफ की गई अपवित्र टिप्पणियों से दुखी है।'
आगे उन्होंने लिखा, 'खालसा पंथ अपनी दिव्य प्रेरणा और अधिकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से प्राप्त करता है, जो गुरु साहिबान का शाश्वत जीवित स्वरूप हैं। ऐसे में सिख गुरु साहिबान के खिलाफ सुश्री आतिशी की गहरी चोट पहुंचाने वाली टिप्पणियां सिख धार्मिक सिद्धांत के तहत धार्मिक ईशनिंदा (बेअदबी) है और हर सिख इसे अपनी आध्यात्मिक पहचान पर हमला मानता है।'
साथ ही उन्होंने कहा, 'इसके अलावा, ये टिप्पणियां जानबूझकर, दुर्भावनापूर्ण, सोची-समझी और सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई हैं। इन तथ्यों को देखते हुए, मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूं कि आप आतिशी के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और समुदायों के बीच दुश्मनी और वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए धारा 196 BNS के तहत FIR दर्ज करने की सिफारिश करें।'
अपने पत्र में बादल ने लिखा कि 'विधायी दृष्टिकोण से भी सुश्री आतिशी का आचरण विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना है, और एक विधायक के लिए अशोभनीय आचरण है। एक सदस्य जो सार्वजनिक रूप से अल्पसंख्यक सिख समुदाय के विश्वास, गुरु साहिबान और धार्मिक भावनाओं का अपमान करता है, वह न केवल नैतिक वैधता खो देता है, बल्कि कानून निर्माता बने रहने का संवैधानिक अधिकार भी खो देता है।'
इसके अलावा, उन्होंने लिखा कि ये उकसावे पंजाब और देश के बाकी हिस्सों में कड़ी मेहनत से बनाए गए शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के माहौल के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं। ऐसे में मैं आपसे औपचारिक रूप से अनुरोध करता हूं कि आप सुश्री आतिशी को दिल्ली विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करने के लिए उचित कदम उठाएं। मुझे कोई शक नहीं है कि आप इस मुद्दे को पूरी गंभीरता और प्राथमिकता देंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम करेंगे ताकि हमारा देश सभी धर्मों, खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सम्मान का प्रतीक बन सके।





