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यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा, 15-20 परिवार हुए बेघर; सामान समेटकर जाने लगे लोग

यमुना नदी के जलस्तर ने खतरे के निशान को पार कर दिया है। ऐसे में प्रशासन ने फूलों, सब्जियों और मछली पालन के जरिए जीवनयापन करने वाले लोगों को यमुना खादर छोड़ने का निर्देश दे दिया है।

यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा, 15-20 परिवार हुए बेघर; सामान समेटकर जाने लगे लोग
Sneha Baluniप्रमुख संवाददाता,नई दिल्लीTue, 11 Jul 2023 08:02 AM
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हर साल की तरह इस बार भी यमुना के उफनाते ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को घर छोड़ना होगा। प्रशासन ने फूलों, सब्जियों और मछली पालन के जरिए जीवनयापन करने वाले लोगों को यमुना खादर छोड़ने का निर्देश दे दिया गया है। अब उन्हें अपने अशियाना उजाड़ना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि उन्हें बाहर जाने को कह रहे हैं, लेकिन अभी तक न तो टेंट लगा है न ही रहने की कोई व्यवस्था है। हम कहा खुले आसमान के नीचे रहेंगे।

सामान समेटना शुरू

यमुना खादर क्षेत्र में खेती-बाड़ी कर रहे लोगों ने सामान समेटना शुरू कर दिया है। सोमवार दोपहर एक बजे दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर अक्षरधाम ब्रिज के पास रहने वाले लोग अपने घरों का सामान समेट रहे थे। ब्रिज के नीचे बड़ी संख्या में लोग कच्चे मकान और झुग्गी बनाकर रहते हैं। यहीं पर रहने वाले सोनू कहते हैं कि वह यमुना के क्षेत्र में सब्जियां पैदा करते हैं और फिर उन्हीं को बेचकर घर चलाते हैं, लेकिन अब बाढ़ आने का खतरा है। जो भी घर का सामान है, उसको एक्सप्रेसवे के किनारे फुटपाथ पर रखेंगे।

घर-खेत डूबा, तालाब की मछली भी बही

यमुना का जलस्तर बढ़ने से खादर में रहने वाले लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय किसानों से खेत किराए पर लेकर खेती करने वाले लोग रहते हैं। ऐसे ही मुजफ्फरपुर निवासी जगन्नाथ भी यमुना के किनारे झोपड़ी बना कर रहते हैं, लेकिन बाढ आने की वजह से घर छोड़ना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि दो लाख रुपये के किराए पर एक तालाब किराए पर लिया था। इसमें विभिन्न किस्मों की मछली के बीज डाले थे, लेकिन बाढ़ आने की वजह से मछली बह गई और करीब पांच लाख का नुकसान हो गया। रामवती ने बताया, खेतों में पानी भरने से सब्जियां अब सड़ जाएंगी। अब वे पुश्ते वाली सड़क पर ठिकाना बनाएंगी।

घर छोड़ने को कह दिया

यमुना लोहा पुल में करीब 15 से 20 परिवार रहते हैं और सब्जी की खेती करते हैं। शारदा और तारावती का कहना है कि यमुना में जलस्तर बढ़ने के साथ ही उनके परिवारों पर मुसीबत बढ़ जाती है। साहब बोल कर गए कि सामान बांध कर रखो, जब भी यमुना में पानी बढ़े तो ऊपर की तरफ आ जाना, लेकिन ऊपर न तो तंबू लगाए हैं और न ही पीने के पानी की व्यवस्था है।

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