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जमीन विवाद में अटका 100 बेड के अस्पताल का काम, किसानों ने रुकवाया काम; क्या आरोप

जेवर एयरपोर्ट के पास बनने वाले 100 बेड के मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल का काम जमीन विवाद के कारण अटक गया है। यहां 10 दिन से काम ठप है। किसानों ने काम रुकवा दिया है। पिछले साल शिलान्यास हुआ था।

जमीन विवाद में अटका 100 बेड के अस्पताल का काम, किसानों ने रुकवाया काम; क्या आरोप
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नोएडाSat, 24 Feb 2024 05:57 AM
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जमीन विवाद के कारण जेवर एयरपोर्ट के पास बनने वाले 100 बिस्तरों का मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल का काम रुक गया है। यहां 10 दिन से काम ठप है। किसानों ने कुछ हिस्से को आबादी की जमीन बताकर काम रुकवा दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने यमुना प्राधिकरण से मामले के निस्तारण की मांग की है। यमुना क्षेत्र के सेक्टर-22 ई में 100 बिस्तर का ट्रॉमा सेंटर और इतने ही बिस्तर का मल्टीस्पेश्यलिटी बनाया जाना है। करीब 24 हजार वर्ग मीटर में बनने वाली दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास पिछले साल जुलाई में हुआ था। 

यमुना प्राधिकरण ने दोनों स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निशुल्क जमीन दी है। ट्रॉमा सेंटर का निर्माण चल रहा है, लेकिन 100 बिस्तरों के मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल का निर्माण किसानों ने विरोध कर रुकवा दिया है। किसानों का आरोप है कि चिकित्सकीय सुविधा के लिए ली गई करीब सात हजार वर्ग मीटर आबादी की जमीन है। यहां अस्पताल जमीन समतल करने का काम किया जा रहा था।

समाधान के लिए पत्र लिखा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि किसानों के विवाद के कारण अभी काम रुका हुआ है। इसके निस्तारण की मांग प्राधिकरण से की गई है। इसके लिए पत्र लिखा गया है। विवाद खत्म होते ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में कोई परेशानी नहीं है। इसका काम चल रहा है।

ट्रॉमा सेंटर इसी वर्ष बनकर तैयार होगा

जेवर के पास बनने वाला ट्रॉमा सेंटर साल के अंत तक बनकर तैयार होगा। यह जिले का पहला सरकारी ट्रॉमा सेंटर होगा। वहीं, मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल भी साथ में ही बनकर तैयार होना था, लेकिन विवाद के कारण इसके बनने में देरी हो सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दोनों अस्पताल एक साथ बनकर तैयार होंगे। दोनों का संचालन स्वास्थ्य विभाग करेगा। निर्माण पूरा होने से 15 दिन पहले ही डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे।

पड़ोसी जिलों को भी लाभ होगा

ट्रॉमा सेंटर और मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल के बनने से नोएडा-ग्रेटर नोएडा के साथ ही आसपास के जिलों के गंभीर मरीजों को भी फायदा होगा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तीन एक्सप्रेसवे हैं, जहां प्रतिदिन दुर्घटना के कारण लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। ऐसे मरीजों को निजी अस्पताल या दिल्ली के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता है। दोनों अस्पताल बनने से मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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