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9 मार्च, 2021|4:18|IST

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अमीर बनने की चाह में महिला ने नामी स्कूलों के दो हजार से अधिक छात्रों को नशे का गुलाम बनाया

E- cigarette

अमीर बनने के लिए एक महिला ने दिल्ली के नामी स्कूलों के दो हजार से अधिक छात्रों को नशे का गुलाम बना दिया। इस बात का खुलासा मुखर्जी नगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई इस महिला से पूछताछ के दौरान हुआ है।

आरोपी महिला ई-सिगरेट, जूल एवं नार्ड जैसे आधुनिक नशा एवं उपकरण छात्रों को बेचती थी। फिलहाल महिला का मैनेजर फरार है जिसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह के बारे में और जानकारी मिल सकेगी। दरअसल, इस गिरोह का खुलासा बीते शनिवार को हुआ जब एक किशोर के व्हाट्सएप ग्रुप की चैट उसकी मां ने पढ़ ली। वॉट्सऐप ग्रुप में किसी अजीब चीज का जिक्र था। किशोर मॉडल टाउन स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल में 11वीं का छात्र है। चूंकि किशोर ने हाल के दिनों में चार से पांच लाख रुपये बैंक खातों से निकाले थे, इसलिए परिजनों का शक गहरा गया।

वॉट्सऐप ग्रुप बना नाबालिगों को नशा बेचने वाली महिला पकड़ी, बड़े घरों के बच्चों को बनाती थी शिकार

पूछने पर जब किशोर ने सारी बात बताई तो परिजनों ने पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। चूंकि मामला बेहद हाई प्रोफाइल था, इसलिए एसएचओ करण सिंह राणा और एसआई दीपक कुमार सहित 15 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई। टीम ने राजौरी गार्डन में रहने वाली पूजा साहनी को गिरफ्तार किया।

इन चार तरीकों से फंसाया जाता था शिकार

1. स्कूलों एवं कोचिंग सेंटर के आसपास गिरोह के एजेंट नए छात्रों को नशे का आदी बनाते थे

2. मल्टी लेवल मार्केटिंग की तर्ज पर पुराने छात्रों के माध्यम से नए छात्रों को निशाना बनाते थे

3. फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए छात्रों को लुभाते थे

4. पब एवं पार्टियों में एजेंट खुद नशे का सेवन कर छात्रों को ग्राहक बनाते थे

फेयरवेल कार्यक्रम में भी होती थी नशे की आपूर्ति 

जांच में मालूम हुआ है कि दिल्ली के दो दर्जन से अधिक हाई प्रोफाइल स्कूलों के छात्रों को यह गिरोह अपना निशाना बनाता था। इनके कब्जे से मिले सबूतों के अनुसार करीब दो हजार छात्र इस गिरोह के सीधे संपर्क में थे। इस साल मार्च में एक स्कूल के फेयरवेल कार्यक्रम में भी महिला ने आपूर्ति की थी। दो दर्जन से अधिक छात्राओं ने भी नशीले पदार्थों की खरीद की थी। महिला ने अपनी एसयूवी को स्टोर जैसा बना लिया था।

उपकरण और नशे पर हजारों रुपये खर्च करते

नशा करने के लिए उपकरण भी बेहद हाई प्रोफाइल होता है। इसमें ई-सिगरेट के अलावा जूल पाड्स, हुक्का और नार्ड किट आदि हैं। पेन ड्राइव की तरफ दिखने वाला जूल करीब चार हजार रुपये का आता है। इसमें लगने वाला पाड्स दो से छह हजार रुपये का है। नार्ड किट की भी कीमत छह हजार से दस हजार तक की होती है। इसे चार्ज कर सकते हैं। इसके अलावा ई-सिगरेट और हुक्का आदि भी हैं।

विदेशों से होता था आयात

पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला के कुछ जानकार विदेशी व्यापार से जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि ये उपकरण और नशे का सामान चोरी छिपे-विदेश से ला रहे थे।

पेटीएम के जरिये भुगतान

नशे के जिन सामानों को पहुंचाया जाता था उसका भुगतान पेटीएम के जरिए किया जाता था। मुखर्जी नगर मामले में छात्र ने करीब चार लाख रुपये का भुगतान इस महिला को किया था। पुलिस का अनुमान है कि बैंक खातों और पेटीएम खातों की जांच के बाद यह आंकड़ा करोड़ों रुपये तक जा सकता है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यूपीआई आदि से भी भुगतान किया गया है।

छह साल से चल रहा गिरोह

महिला ने बताया कि वह रियल इस्टेट के कारोबार से जुड़ी हुई थी। लेकिन व्यवसाय मंदा होने के कारण उसने तम्बाकू और पान की हाईप्रोफाइल दुकानें खोल ली। चूंकि खर्च के अनुसार आमदनी नहीं हो रही थी इसलिए उसने नशे के कारोबार को शुरू किया। सूत्रों के अनुसार 2014 से महिला इस नशे के कारोबार को कर रही थी। अब तक उसने इस कारोबार से करोड़ों रुपये कमाए हैं जिसकी जांच की जा रही है।

रेस्तरां के पकवान की तरह रखे हैं नशे के नाम

गिरोह वॉट्सऐप एवं टेलीग्राम के जरिए नशे का मेन्यू छात्रों को भेजता था। इसमें निकोटिन के अलग-अलग टेस्ट के साल्ट रहते थे जिन्हें आकर्षक नाम दिए गए थे। जैसे ट्रॉपिक मैंगो, स्ट्राबेरी आईस, स्पीयरमिंट गम, क्लासिक मेंथॉल और स्ट्राबेरीकैंडी आदि प्रमुख हैं। इनके मेन्यू में दो दर्जन से अधिक वेराइटी मौजूद थीं।

एयरोसॉल्स और अधिक धुआं आकर्षक

इन नशीले पदार्थों के प्रयोग से आम सिगरेट से अधिक धुआं निकलता था। यह एयरोसॉल्स होता है और अधिक धुएं के कारण इन छात्रों में बेहद तेजी से फैल रहा था। अब पुलिस विभिन्न स्कूलों में इनकी जड़ें भी तलाश रही है।

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  • Web Title:Woman provides Addiction to Over 2000 Students of Famous Schools of Delhi-NCR