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9 जनवरी, 2021|12:09|IST

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युवती ने अपनी इच्छा से की है शादी, उसे बाल गृह से रिहा किया जाए : दिल्ली हाईकोर्ट

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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक युवती को बाल गृह से रिहा करने का शुक्रवार को निर्देश जारी करते हुए कहा कि वह बालिग है और उसने अपनी इच्छा से शादी की थी। दरअसल, युवती के पिता ने पुलिस के पास गुमशुदगी की एक शिकायत दर्ज कराई थी और इसमें उन्होंने दावा किया था कि वह नाबालिग है, जिसके बाद पुलिस ने युवती को बाल गृह में रखा था।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी एवं जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की अवकाशकालीन बेंच ने यह भी कहा कि यदि युवती की इच्छा हो, तो उसे अपने पति के साथ भेज दिया जाए। उल्लेखनीय है कि युवती के पति ने हाईकोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर 18 वर्षीय अपनी पत्नी को रिहा करने का अनुरोध किया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति को हाईकोर्ट में पेश करने का निर्देश जारी कराने के लिए किया जाता है, जो लापता हो या जिसे अवैध रूप से हिरासत में रखा गया हो। 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान युवती को बेंच के समक्ष पेश किया गया। युवती ने न्यायाधीशों से कहा कि उसका जन्म जून 2002 में हुआ था, ना कि फरवरी 2004 में, जैसा कि उसके पिता ने दावा किया है।

युवती ने हाईकोर्ट से कहा कि वह एक व्यक्ति के साथ चली गई थी और उसके साथ अपनी इच्छा के अनुसार 18 दिसंबर 2020 को शादी की थी। बेंच ने युवती से सवाल-जवाब करने और मामले के जांच अधिकारी द्वारा सत्यापित दस्तावेजों पर गौर करने के बाद कहा कि यह नजर आता है कि 18 दिसंबर 2002 को लड़की बालिग थी। विवाह प्रमाणपत्र सत्यापित नहीं किया गया है।

हाईकोर्ट का मानना है कि चूंकि यह लड़की बालिग है, इसलिए उसे उड़ान रोज चिल्ड्रन होम फॉर गर्ल्स में अब और रखने की कोई वजह नहीं है। कोर्ट ने युवती की इस दलील का भी जिक्र किया कि वह अपने 25 वर्षीय पति के साथ रहना चाहती है। बेंच ने कहा कि इन परिस्थितियों में, याचिका का इस निर्देश के साथ निस्तारण किया जाता है कि लड़की को उड़ान रोज चिल्ड्रन होम फॉर गर्ल्स, कमला नगर से रिहा किया जाए और याचिकाकर्ता (उसके पति) के साथ भेज दिया जाए, बशर्ते कि वह उसके साथ जाने की इच्छुक हो। हाईकोर्ट ने पुलिस को मौखिक रूप से कहा कि वह दंपति के जीवन को खतरे में न पड़ने दे।

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  • Web Title:Woman married to her will she should be released from children Home says Delhi High court