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हिंदी न्यूज़ NCRमेयर चुनाव में LG बिगाड़ेंगे 'आप' का खेल? MCD में बहुमत पाकर भी केजरीवाल को सता रहा है ये डर

मेयर चुनाव में LG बिगाड़ेंगे 'आप' का खेल? MCD में बहुमत पाकर भी केजरीवाल को सता रहा है ये डर

MCD में बहुमत पाकर 'आप' महापौर चुनाव पूरी तैयारी से लड़ना चाहती है। पार्टी महापौर चुनाव की तैयारी में जुटने के साथ एमसीडी एक्ट के तहत पूरी चुनाव प्रक्रिया के कानूनी पहलुओं की जानकारी ले रही है।

मेयर चुनाव में LG बिगाड़ेंगे 'आप' का खेल? MCD में बहुमत पाकर भी केजरीवाल को सता रहा है ये डर
Praveen Sharmaनई दिल्ली | हिन्दुस्तानFri, 09 Dec 2022 06:43 AM

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आम आदमी पार्टी (आप) ने भले ही दिल्ली नगर निगम चुनाव में पूर्ण बहुमत से जीत हासिल कर ली हो, लेकिन मेयर चुनाव को लेकर अब भी उसे एक बड़ा डर सता रहा है। 'आप' महापौर चुनाव पूरी तैयारी से लड़ना चाहती है। पार्टी महापौर चुनाव की तैयारी में जुटने के साथ एमसीडी एक्ट के तहत पूरी चुनाव प्रक्रिया के कानूनी पहलुओं की जानकारी ले रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अभी महापौर चुनाव में समय है। अभी हम लोग कानूनी पहलुओं को देख रहे हैं। उसके बाद महापौर के नाम का चयन किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

दिल्ली में आगामी 15 दिसंबर तक निगम चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू है। आचार संहिता खत्म होने के बाद ही एमसीडी के गठन के साथ महापौर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। एमसीडी में पूर्ण बहुमत के लिए 126 पार्षदों की जरूरत है। आम आदमी पार्टी ने कुल 134 सीट पर जीत हासिल की है। उसके बाद भी पार्टी महापौर चुनाव में किसी भी चूक से बचने के लिए पूरी तैयारी कर रही है।

दरअसल, महापौर चुनाव में दिल्ली के सांसद, 14 विधायकों को वोटिंग का अधिकार प्राप्त है। इन 14 विधायकों को दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष नामित करता है। हालांकि, उसकी अंतिम मंजूरी एलजी से लेनी होती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, अभी हम मताधिकार के कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। दरअसल पार्टी को डर है कि कहीं भाजपा जिसके पास 104 पार्षद हैं वह चुनाव में कोई तोड़-फोड़ न करें। चूकि पहले साल महिला महापौर होगी। पार्टी की ओर से 140 वार्ड पर महिलाओं को टिकट दिया गया था, जिसमें 75 उम्मीदवारों को जीत मिली है। उन्हीं में से एक का चयन होगा। हालांकि, पार्टी का कहना है कि अभी कोई नाम तय नहीं है। पार्टी का कहना है कि पहले पार्षदों के साथ एक बैठक होगी। उसमें कुछ नाम तय करने के बाद पार्टी के पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की बैठक होगी। उसमें ही महापौर के नाम पर आखिरी मुहर लगेगी।

विशेषज्ञ बोले, इस बार छह मेयर बनने की संभावना 

परिसीमन और तीनों निगमों के एकीकरण के चलते निगम चुनाव में हुई देरी ने मेयर पद की परंपरा पर संशय खड़ा कर दिया है। राजधानी में अप्रैल से मार्च तक एक वर्ष के लिए मेयर का कार्यकाल रहा है। इस बार दिसंबर में निगम का गठन होने से सवाल खड़े हो गए हैं कि पहले मेयर का कार्यकाल कितना होगा।

परंपरा बदलेगी या एक्ट में होगा संशोधन

निगम मामले के विशेषज्ञ जगदीश ममगई कहते हैं कि निगम एक्ट में एक वर्ष के लिए मेयर का प्रावधान है। इसे निगम ने वित्तीय वर्ष के हिसाब से तय कर दिया था। मेयर को पूरे वित्तीय वर्ष का समय मिलता रहा है। इस बार यह परंपरा बदल सकती है और दिसंबर से दिसंबर तक का कार्यकाल महापौर को मिल सकता है। उन्होंने बताया कि अगर मार्च की व्यवस्था रही तो मेयर की संख्या छह हो जाएगी। इसके लिए निगम के एक्ट में बदलाव करना होगा।

अप्रैल में होते हैं चुनाव

मेयर का कार्यकाल अप्रैल से मार्च तक होता है। निगम गठन से ही इस परंपरा को निभाया गया है। मेयर का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। पहला अवसर महिला के लिए सुरक्षित है। ऐसे में एकीकृत निगम को पहली मेयर महिला मिलेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर मार्च में कार्यकाल पूरा होता है तो पहले मेयर को कितना समय मिलेगा।