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क्या गाजीपुर और भलस्वा डेयरी का दूध पिएंगे नौकरशाह? MCD को HC ने क्यों लगाई फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को फटकार लगाई है। कोर्ट ने भलस्वा और गाजीपुर डेयरी को रीलोकेट करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि हम कड़ा आदेश पारित करेंगे।

क्या गाजीपुर और भलस्वा डेयरी का दूध पिएंगे नौकरशाह? MCD को HC ने क्यों लगाई फटकार
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 28 May 2024 10:32 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को फटकार लगाई। कोर्ट ने भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइट के पास मौजूद डेयरी को रीलोकेट करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। एमसीडी से पूछा कि क्या निर्णय लेने में किसी तरह के राजनीतिक विचार शामिल हैं। नगर निगम के वकील ने कहा कि रीलोकेशन के निर्णय पर विशेषज्ञों द्वारा विचार किया जा रहा है, जिसपर अदालत नाराज हो गया। 

एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन औप जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने एमसीडी के वकील को फटकार लगाते हुए कहा, 'संकीर्ण राजनीतिक हितों से गाइडेड (दिशानिर्देश लेना) न हों। यदि इसे शहर में जगह नहीं दी जा सकती, तो शहर के बाहर भेज दीजिए। क्या विभाग का नेतृत्व करने वाले नौकरशाह भलस्वा और गाजीपुर डेयरी का दूध पी सकते हैं? पूरी तरह अनुशासन खत्म हो गया है क्योंकि विशेषज्ञ संकीर्ण राजनीतिक विचारों से गाइडेड हो रहे हैं। हम कड़ा आदेश पारित करने में संकोच नहीं करेंगे। जमीनी स्तर पर, हमें नहीं लगता कि दिल्ली प्रशासन मौजूद है।'

कोर्ट ने 8 मई को जारी किए गए कई निर्देशों का पालन करने में विफल रहने को लेकर भी एजेंसी की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि उसका रवैया चीजों को सुविधाजनक बनाने के बजाय बाधा डालने वाला है। कोर्ट ने कहा, 'सच्चाई यह है कि जमीनी स्तर पर चीजें दयनीय हैं। निर्देशों के बावजूद कुछ नहीं हुआ, अस्पताल काम नहीं कर रहे, पूरी जगह कूड़े से भरी हुई है। इच्छाशक्ति और रवैये की निश्चित तौर पर कमी है।' अदालत ने यह टिप्पणी सुनयना सिब्बल, आशेर जेसुदोस और अक्षिता कुकरेजा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। 

इन तीनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में केंद्र और राज्य सरकार के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन डेयरियों में पशु क्रूरता, क्षमता से ज्यादा पशु, जानवरों को उनके मलमूत्र में लेटाना, उनकी चोटों और बीमारियों पर बिलकुल ध्यान न देना, नर बछड़ों को भूखा रखना और जानवरों का म्यूटिलेशन करना शामिल है। याचिका में डेयरी कॉलोनियों में कई जगहों पर पशुओं के सड़ते शवों, मल-मूत्र के ढेर और सार्वजनिक सड़कों पर फेंके गए बछड़ों के शवों को भी उजागर किया गया, जिससे मक्खियों का संक्रमण और मच्छरों का प्रजनन बढ़ रहा है।

बता दें कि एक मई को, हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया गाजीपुर और भलस्वा डेयरियों को रीलोकेट किए जाने की जरूरत है। अदालत ने कहा था कि इन डेयरियों में मवेशी हमेशा खतरनाक अपशिष्टों को खाएंगे और उनका दूध, अगर इंसानों द्वारा पीया जाता है, तो इसका उनके स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।