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Hindi News NCR'सेक्स करने से मना करती थी पत्नी', दिल्ली हाईकोर्ट ने कपल में विश्वास की कमी बता तलाक देने से किया इनकार

'सेक्स करने से मना करती थी पत्नी', दिल्ली हाईकोर्ट ने कपल में विश्वास की कमी बता तलाक देने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि विवाहित जोड़ों के बीच चिड़चिड़ेपन, मामूली मनमुटाव और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता के साथ भ्रमित नहीं किया जा सकता है।

'सेक्स करने से मना करती थी पत्नी', दिल्ली हाईकोर्ट ने कपल में विश्वास की कमी बता तलाक देने से किया इनकार
Praveen Sharmaनई दिल्ली। पीटीआईTue, 31 Oct 2023 10:45 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि विवाहित जोड़ों के बीच चिड़चिड़ेपन, मामूली मनमुटाव और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता के साथ भ्रमित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने सोमवार को पत्नी के खिलाफ पति की याचिका पर तलाक देने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की।

पति ने पत्नी द्वारा मानसिक क्रूरता के कारण तलाक मांगा और आरोप लगाया कि उसे ससुराल में उसके साथ रहने में कोई दिलचस्पी नहीं थी और वह चाहती थी कि पति उसके साथ उसके मायके में 'घर जमाई' के रूप में रहे। दोनों की शादी 1996 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई और 1998 में दंपति की एक बच्ची हुई।

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पति ने दावा किया था कि उसकी पत्नी किसी न किसी बहाने से उसे अकेला छोड़ देती थी और केवल अपना कोचिंग सेंटर चलाने में रुचि रखती थी। उसने आरोप लगाया था कि उसे यहां तक कि पत्नी उसे सेक्स करने से भी मना करती थी।

जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने पत्नी की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि यद्यपि सेक्स करने से इनकार करना मानसिक क्रूरता का एक रूप माना जा सकता है, लेकिन जब यह लगातार, जानबूझकर और काफी समय तक हो। बेंच ने कहा कि हालांकि, अदालत को ऐसे संवेदनशील और नाजुक मुद्दे से निपटने में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप केवल अस्पष्ट बयानों के आधार पर साबित नहीं किए जा सकते, खासकर तब जब शादी विधिवत संपन्न हुई हो। बेंच ने पाया कि पति अपने ऊपर किसी भी मानसिक क्रूरता को साबित करने में विफल रहा है और वर्तमान मामला ''वैवाहिक बंधन में केवल सामान्य मनमुटाव का मामला है।'' 

बेंच ने कहा, "इस बात का कोई सकारात्मक संकेत नहीं है कि पत्नी का आचरण इस तरह का था कि उसके पति के लिए उसके साथ रहना संभव नहीं था। मामूली चिड़चिड़ापन और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता के साथ भ्रमित नहीं किया जा सकता है।"

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अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह तथ्य कि महिला ने एक आपराधिक शिकायत के साथ पुलिस से संपर्क किया था, जिसके परिणामस्वरूप उसके पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसे अंततः मामले में संदेह का लाभ दिया गया, क्रूरता नहीं होगी। अदालत ने कहा कि इस प्रकार, जो तस्वीर उभर कर सामने आती है वह बहुत स्पष्ट है। पक्षों के बीच विश्वास, आस्था और प्रेम की कमी हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद, वे दोनों परिवार को बचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। केवल इसलिए कि पत्नी ने अपनी शिकायत के निवारण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जैसा कि उसके पति ने भी किया था, क्रूरता को बढ़ावा देने के समान नहीं हो सकता है।