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चुनाव से पहले जयंत चौधरी की RLD में क्यों मचा घमासान, पार्टी की नीति या पैसे का हिसाब बना वजह

लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल में घमासान मच गया है। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेताओं ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है। प्रदेश अध्यक्ष ने सदस्यता रसीदों के पैसे में गड़बड़ी का दावा किया है।

चुनाव से पहले जयंत चौधरी की RLD में क्यों मचा घमासान, पार्टी की नीति या पैसे का हिसाब बना वजह
Sneha Baluniनिशांत कौशिक,नोएडाThu, 30 Nov 2023 09:34 AM
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लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल में घमासान मच गया है। पार्टी के बड़े नेता लगातार इस्तीफा दे रहे हैं और पार्टी की नीतियों पर सवाल उठा रहे। दूसरी ओर, प्रदेश अध्यक्ष ने सदस्यता रसीदों के पैसे में गड़बड़ी का दावा किया है। उनका कहना है कि हिसाब मांगने पर कुछ नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। एक दिन पूर्व ही पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह, युवा रालोद के राष्ट्रीय सचिव अमित कुमार पटेल और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष आरिफ मौहम्मद ने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 

इन नेताओं ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली ठीक नहीं है और शीर्ष नेतृत्व ने किसानों की आवाज उठाना बंद कर दिया है। उनका आरोप है कि पार्टी में स्वघोषित दूसरे नंबर के नेता पार्टी के बेस वोट बैंक से ही नफरत करते हैं। दूसरी ओर, प्रदेश अध्यक्ष कहना है कि सदस्यता की रसीदों में गोलमाल हुआ है। हिसाब-किताब मांगने पर लोग पार्टी छोड़ रहे हैं। इस घमासान के बीच रालोद के एक बड़े धड़े के शीघ्र भाजपा में जाने का दावा किया जा रहा है।

अल्पसंख्य प्रकोष्ठ में आक्रोश 

रालोद के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में सबसे अधिक आक्रोश है। एक नवंबर को पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष शब्बीर अली और काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष नौशाद खान ने अनेक पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर अल्पसंख्यक समाज के नेताओं की बात न सुनने तथा अपमानित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश कार्यालय में प्रकोष्ठ के कार्यालय को भी समाप्त कर दिया गया है। 28 नवंबर को प्रदेश अध्यक्ष आरिफ महमूद ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को भेजे पत्र में राष्ट्रीय व प्रदेश के नेताओं पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस्तीफों की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को दी गई तो इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

लोकदल की बढ़ी सक्रियता 

रालोद में चल रहे घमासान के बीच ही लोकदल की सक्रियता भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ने लगी है। रालोद और लोकदल की सियासी लड़ाई भी पुरानी है। वर्ष 1974 में चौधरी चरण सिंह ने भारतीय लोकदल नाम से अपनी पार्टी बनाई थी। 1977 में इंदिरा गांधी का मुकाबला करने के लिए कई नेताओं ने अपनी पार्टियों का विलय कर जनता पार्टी बनाई। 1977 में कांग्रेस पार्टी को हराकर जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई। 1980 में मतभेदों के कारण जनता पार्टी टूट गई। चौधरी चरण सिंह ने लोकदल बनाया। 1987 में चौधरी चरण सिंह के देहांत के बाद लोकदल पर कब्जे की लड़ाई छिड़ गई। बाद में यह लड़ाई चुनाव आयोग पहुंची गई। पार्टी पर दावा करने वालों में चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह भी शामिल थे, लेकिन उनकी मंशा पूरी नहीं हुई। तब अजीत सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल के नाम से पार्टी बना ली थी। दूसरी ओर, कानूनी लड़ाई के बाद लोकदल अलीगढ़ के जाट नेता चौधरी राजेंद्र सिंह के हाथों में पहुंच गई और उन्हीं के बेटे सुनील चौधरी अब अध्यक्ष हैं। लोकसभा चुनाव से पहले दल ने रोड शो के साथ होर्डिंग प्रचार शुरू कर दिया है। लोकदल सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है। इससे रालोद के लिए चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

रसीदों का कोई विवाद नहीं मनजीत सिंह

कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले मनजीत सिंह ने कहा कि रसीदों से उनका कोई मतलब नहीं है। रसीदों के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष राम आशीष राय और सुरेन्द्र नाथ तिवारी हैं। उन्होंने एक राष्ट्रीय पदाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। अन्य दल में जाने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि वह एक राजनीतिक व्यक्ति हैं तो किसी ना किसी दल में तो काम करेंगे ही। उन्होंने कहा कि अन्य दलों के नेताओं से बात चल रही है।

पैसा पार्टी में जमा नहीं कराया प्रदेश अध्यक्ष

रालोद के प्रदेश अध्यक्ष राम आशीष राय ने कहा कि मनजीत सिंह के पास कोई पद नहीं है। नई कार्यकारिणी में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कोई नहीं है। पार्टी की सदस्यता की रसीदों में गोलमाल हुआ है। अब इन रसीदों का हिसाब-किताब लिया जा रहा है। कुछ लोगों ने पैसा जमा करा दिया है और कुछ लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। इन लोगों ने सदस्यता रसीदों का पैसा कार्यालय में जमा नहीं किया है।

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