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केजरीवाल के सचिव पर क्यों पड़ा छापा, दिल्ली जल बोर्ड को लेकर ED का क्या है दावा

ईडी ने जिन रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है उससे यह जानकारी सामने आई है कि 38 करोड़ रुपये के इस टेंडर में सिर्फ 17 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल काम के लिए किया गया। बाकी पैसे घूस के लिए यूज किए गए।

केजरीवाल के सचिव पर क्यों पड़ा छापा, दिल्ली जल बोर्ड को लेकर ED का क्या है दावा
Nishant Nandanपीटीआई,नई दिल्लीTue, 06 Feb 2024 03:18 PM
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दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की ताबड़तोड़ ऐक्शन से हड़कंप मचा हुआ है। ED ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार और अन्य के खिलाफ छापेमारी की। यह छापेमारी कथित तौर पर दिल्ली जल बोर्ड की टेंडर प्रक्रिया में रिश्वत लेकर गड़बड़ी करने के आरोपों से जुड़ी है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस टेंडर प्रक्रिया को AAP के चुनावी फंड को ध्यान में रखकर जारी किया गया था। सुबह करीब 7 बजे ईडी की टीम ने राजधानी दिल्ली में 10-12 ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत यह छापा मारा। 

ED की टीम ने जहां यह छापमार कार्रवाई की है उनमें विभव कुमार का आवास भी शामिल है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के पूर्व सदस्य सल्लभ कुमार के आवास, AAP के राज्यसभा सांसद एनडी गुप्ता के कार्यालय और एक सीए पंकज मंडल के ठिकाने समेत आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने कहा कि ED की यह नई कार्रवाई राजनीतिक पार्टी को डराने के लिए है। 

दिल्ली जल बोर्ड की जिस टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर यह छापेमारी की गई उस मामले में ईडी पहले ही दिल्ली जल बोर्ड के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर जगदीश कुमार अरोड़ा और ठेकेदार अनिल कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है। इन्हें 31 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। एक विशेष PMLA अदालत ने सोमवार को इन दोनों की रिमांड अवधि 5 दिनों के लिए बढ़ा दी थी। ईडी ने अदालत में दावा किया था कि इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए इन दोनों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जरूरत है।

ED की जांच में पता चला कि DJB का यह कॉन्ट्रैक्ट काफी महंगी दरों पर दिए गए। ऐसा इसलिए ताकि घूस के तौर पर मोटी रकम बाद में ठेकेदारों से ली जा सके। ईडी ने जिन रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है उससे यह जानकारी सामने आई है कि 38 करोड़ रुपये के इस टेंडर में सिर्फ 17 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल काम के लिए किया गया। इसके अलावा बाकी बचे हुए पैसों को फर्जी खर्चों में दिखा दिया गया है। ईडी का दावा है कि जो फर्जी खर्च दिखाया गया था वो पैसे घूस और इलेक्शन फंड में खर्च किए गए।  

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