ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCRऊपर से नीचे तक नहीं था मेल; AAP-कांग्रेस की दोस्ती के बाद भी क्यों बिगड़ा खेल; 4 वजहें

ऊपर से नीचे तक नहीं था मेल; AAP-कांग्रेस की दोस्ती के बाद भी क्यों बिगड़ा खेल; 4 वजहें

दिल्ली के सियासी अखाड़े में भाजपा को मात देने के लिए धुर विरोधी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस कांग्रेस साथ आए, लेकिन फिर भी तीसरी बार अपना सूपड़ा साफ होने से नहीं रोक पाए। गठबंधन में कम था मेल।

ऊपर से नीचे तक नहीं था मेल; AAP-कांग्रेस की दोस्ती के बाद भी क्यों बिगड़ा खेल; 4 वजहें
rahul gandhi-arvind kejriwal
Sudhir Jhaगौरव त्यागी,नई दिल्लीWed, 05 Jun 2024 08:22 AM
ऐप पर पढ़ें

दिल्ली के सियासी अखाड़े में भाजपा को मात देने के लिए धुर विरोधी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस कांग्रेस साथ आए, लेकिन फिर भी तीसरी बार अपना सूपड़ा साफ होने से नहीं रोक पाए। भाजपा ने सभी सात सीटों पर जीत हासिल करके लगातार तीसरी बार दिल्ली में अपना परचम लहराया। गठबंधन के बाद भी मिली इस करारी हार को लेकर राजनीतिक विश्लेषक कई कारण बता रहे हैं। इसमें गठबंधन का सही तरीके से जमीन पर नहीं उतरने के अलावा कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के अंदरूनी विवाद भी बड़ा कारण बने।

समन्वय नहीं दिखा 
आप व कांग्रेस भले ही मिलकर लड़ रहे थे, लेकिन चुनाव प्रचार से लेकर मतदान वाले दिन तक दोनों के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय नहीं दिखाई दिया। मतदान वाले दिन अधिकतर केंद्र पर बूथ कमेटियों के लोग दिखाई नहीं दिए। जहां कांग्रेस के उम्मीदवार थे, वहां आप कार्यकर्ता नहीं दिखे। जहां आप के उम्मीदवार थे, वहां कांग्रेस वाले नदारद रहे।

शीर्ष नेतृत्व में भी तालमेल नहीं 
राजनीतिक जानकारों की मानें तो कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि शीर्ष नेताओं में भी समवन्य नहीं दिखा। राहुल गांधी ने दिल्ली में दो रैली की, लेकिन एक में भी आम आदमी पार्टी के नेताओं को न्योता नहीं दिया। जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उस समय चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत पर बाहर थे। यही नहीं, समन्वय के लिए जो समितियां बनीं, वे भी महज खानापूर्ति तक ही सीमित रहीं।

विवादों ने बिगाड़ा गणित 
चुनाव के दौरान दोनों दलों को अपने-अपने विवादों के चलते भी नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस में गठबंधन की घोषणा के बाद टिकट बंटवारे को लेकर झगड़ा हुआ। कांग्रेस के प्रदेशध्यक्ष समेत कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीच में भाजपा का दामन थाम लिया। इससे लोगों में गलत संदेश गया कि कांग्रेस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह मामला शांत होता कि उसके बाद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट का मामला सामने आ गया। इंडिया गठबंधन एक भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं देकर विपक्ष के निशाने पर था, वहीं एक महिला सांसद के मारपीट के मामले ने उन्हें नुकसान किया।

लोकसभा चुनाव में हार होने के पांच बड़े कारण
● जमीन पर आप और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय नहीं दिखा। चुनाव प्रचार से लेकर मतदान वाले दिन तक मतदान केंद्र पर यह साफ दिखाई दिया।
●नेताओं में तालमेल नहीं रहा। केजरीवाल ने कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, लेकिन राहुल की रैली में उन्हें नहीं बुलाया गया।
● कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर उपजा विवाद। उसके बाद कांग्रेस प्रदेशध्यक्ष समेत उनके चार से अधिक पूर्व विधायकों का इस्तीफे के चलते नाराजगी रही।
●आम आदमी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर नाराजगी दिखी।