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एक निर्दोष को सजा ना मिले भले...; केजरीवाल को बेल देने वाली जज ने क्या-क्या कहा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देते समय ट्रायल कोर्ट की जज ने कहा था कि क्या ईडी की जांच जब तक जारी रहेगी, आरोपी को जेल में ही रहना पड़ेगा। जज ने अन्य टिप्पणियां भी की थींं।

एक निर्दोष को सजा ना मिले भले...; केजरीवाल को बेल देने वाली जज ने क्या-क्या कहा
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 22 Jun 2024 11:34 AM
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दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट ने गुरुवार को जमानत दे दी थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि ईडी केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। हालांकि, ईडी द्वारा जमानत के खिलाफ अपील करने के बाद हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। ट्रायल कोर्ट की जज ने अरविंद केजरीवाल को जमानत देते समय कई बातों का जिक्र किया था।

ट्रायल कोर्ट की विशेष जज न्याय बिंदू ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को जमानत देते समय कहा कि यह कोर्ट का कर्तव्य है कि वह जहां दोषी को सजा दे वहीं, यह भी सुनिश्चित करे कि किसी निर्दोष व्यक्ति को सजा न मिले। जज ने बेंजामिन फ्रेंकलिन के उस सिद्धांत का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि भले ही 100 दोषी छूट जाएं, लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलना चाहिए।

जज ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त को अपनी बेगुनाही का एहसास होने तक सिस्टम द्वारा किए गए अत्याचार से गुजरना पड़ा है, तो वह कभी भी यह कल्पना नहीं कर पाएगा कि वास्तव में न्याय उसके पक्ष में किया गया है। जज ने इस बात का भी जिक्र किया कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल को 10 मई को दिए गए अंतरिम बेल का जिक्र करते हुए जज न्याय बिंदू ने कहा कि कभी-कभी अदालत द्वारा अभियुक्त की सामाजिक आर्थिक स्थिति और पिछले आचरण पर भी विचार किया जाता है।

जज ने कहा कि इस मामले में ईडी की जांच अभी भी जारी है। तो क्या जब तक ईडी की जांच जारी रहेगी तब तक आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा। जबकि ईडी ने अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।

ईडी द्वारा पीएमएलए कानून की धारा 45 के तहत जमानत का विरोध करने पर कोर्ट ने कहा था कि कानून कहता है कि जब तक आरोपी व्यक्ति के खिलाफ दोष साबित न हो जाए, उसे निर्दोष माना जाना चाहिए। तो क्या वर्तमान आरोपी पर यह लागू नहीं होता है। जज ने कहा कि ईडी द्वारा इस बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है कि किसी व्यक्ति को ऐसे आपराधिक मामले में आरोपी के रूप में फंसाने के लिए भी कुछ दिशानिर्देशों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई की जानी जरूरी है।

कोर्ट ने गोवा विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी द्वारा हवाला के पैसे खर्च करने के आरोप पर कहा कि दो साल हो गए, लेकिन ईडी अभी तक इस पैसे का एक बड़ा हिस्से का पता नहीं लगा पाई है। जज ने कहा कि पीएमएलए के तहत मामलों में आरोपी के लिए जमानत प्राप्त करना एक असंभव कार्य हो जाता है। क्योंकि किसी न किसी बहाने से जांच एजेंसी कारण बताते हुए आरोपी को लगभग एक दोषी के बराबर की स्थिति में डाल देती है। इस वजह से उसके जेल से मुक्त होने की कोई उम्मीद नहीं बचती है।

लेकिन, यह स्थित तब और भी गंभीर हो जाती है यदि बाद में आरोपी निर्दोष निकले और उसने जो पीड़ा झेली है उसकी वजह अस्पष्ट हो। कोर्ट ने कहा कि यह संभव है कि केजरीवाल को जानने वाला कोई दूसरा व्यक्ति इस अपराध में शामिल हो, लेकिन ईडी केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत दिखाने में नाकाम रही है।   

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