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ट्रांसमिशन लॉस कम किया, पानी की चोरी रोकी और फ्लो मीटर लगवाए; दिल्ली सरकार ने SC में क्या-क्या बताया

पानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पूछे गए सवाल पर दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली जल बोर्ड ने 500 करोड़ रुपये खर्च कर क्लीयर्ड लाइन चैनल को बनवाया और उस ट्रांसमिशन लॉस को 30 फीसदी से घटाया है।

ट्रांसमिशन लॉस कम किया, पानी की चोरी रोकी और फ्लो मीटर लगवाए; दिल्ली सरकार ने SC में क्या-क्या बताया
Nishant Nandanलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 13 Jun 2024 08:15 PM
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दिल्ली में पानी की भारी किल्लत के बीच देश की सुप्रीम अदालत ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि वो राष्ट्रीय राजधानी में पानी की बर्बादी रोकने और वाटर डिस्ट्रीब्यूशन को बढ़ाने के लिए क्या कर रही है? अब इसपर दिल्ली सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को अहम जानकारियां दी गई हैं। दिल्ली सरकार की जल मंत्री आतिशी ने मीडिया को बताया है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछे गए सवाल के संबंध में अदालत में क्या-क्या बताया है। 

आतिशी ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के सामने डिटेल में उन सभी कदमों के बारे में बताए हैं जो हम पिछले एक साल और पानी को लेकर पिछले एक महीने से ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने बताया कि जो पानी हरियाणा से आता है उसमें ट्रांसमिशन लॉस पहले 30 प्रतिशत हुआ करता था। जो रॉ वाटर यमुना नदी, रबी और व्यास से होते हुए वजीराबाद हैदरपुर आता है था उसमें 30 फीसदी ट्रांसमिशन लॉस हुआ करता था। लेकिन दिल्ली जल बोर्ड ने 500 करोड़ रुपये खर्च कर क्लीयर्ड लाइन चैनल को बनवाया और उस ट्रांसमिशन लॉस को 30 फीसदी से घटा कर 5 फीसदी कर दिया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि लीकेज और पानी की बर्बादी को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने पिछले नौ साल में साढ़े तीन हजार किलोमीटर लीक कर रही पानी की पाइपलान को बदला गया है। इसके अलावा 7300 किलोमीटर पाइपलाइन डाली गई है। दरअसल जिन इलाकों में पानी की पाइपलाइन नहीं पहुंची वो मेन पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की अवैध टैपिंग कर पानी की चोरी किया करते थे। लिहाजा अब 7300 किलोमीटर पानी की पाइपलाइन डाली है जिससे अवैध कॉलोनियों में और झुग्गी-झोपड़ियों में  एक सही तरीके से पानी पहुंचता है। 

इसके अलावा अदालत को यह भी जानकारी दी गई है कि पूरी दिल्ली में पानी के फ्लो को मेजर करने के लिए एक बहुत बड़े स्तर पर काम किया गया है। इसके तहत 3285 बल्क फ्लो मीटर लगवाए गए हैं। यानी जिस-जिस प्वाइंट से पानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर निकलता है उस हर प्वाइंट पर फ्लो मीटर लगाया गया है। जो बताते हैं कि कितना पानी निकला और कितना पानी पहुंचा।

दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि यमुना नदी के हरियाणा वाले हिस्से में टैंकर माफिया सक्रिय हैं, जिस पर दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। दिल्ली सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपने हलफनामे में कहा कि पानी के टैंकरों की जरूरत उन क्षेत्रों में है, जो पानी की आपूर्ति लाइन से जुड़े नहीं हैं या जहां आपूर्ति अपर्याप्त है। हलफनामा के अनुसार, शहर में दिल्ली जल बोर्ड और निजी टैंकरों द्वारा प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लाख गैलन पानी की आपूर्ति की जाती है, जो कुल आपूर्ति का केवल आधा प्रतिशत है। 

इसमें कहा गया है, 'दिल्ली जल बोर्ड पानी के टैंकरों की उपलब्धता में सुधार करने की कोशिश कर रहा है, ताकि निजी टैंकरों को भी सार्वजनिक टैंकरों से बदला जा सके। सरकार द्वारा दिल्ली के उपराज्यपाल को कई पत्र लिखे गए हैं। उपराज्यपाल इस दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकृत हैं।' हलफनामे में कहा गया है, 'यमुना नदी के हरियाणा वाले हिस्से में टैंकर माफिया सक्रिय हैं। उस क्षेत्र पर डीजेबी का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।'