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Hindi News NCR20 साल में पहली बार दिल्ली से यूपी तक जल संकट, हथिनीकुंड बैराज का क्यों घटा जलस्तर; सामने आई वजह

20 साल में पहली बार दिल्ली से यूपी तक जल संकट, हथिनीकुंड बैराज का क्यों घटा जलस्तर; सामने आई वजह

Water Crisis: पहले से गर्मी की मार झेल रही दिल्ली जनता अब पानी की किल्लत से परेशान है। 20 साल में पहली बार दिल्ली, हरियाणा और यूपी में जल संकट गहरा गया। ऐसा हथिनिकुंड बैराज में जलस्तर घटने से हुआ।

20 साल में पहली बार दिल्ली से यूपी तक जल संकट, हथिनीकुंड बैराज का क्यों घटा जलस्तर; सामने आई वजह
hathinikund barrage
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्ली सहारनपुरFri, 21 Jun 2024 06:26 AM
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हथिनीकुंड बैराज पर पानी की उपलब्धता रिकॉर्ड स्तर तक घटने से 20 साल में पहली बार दिल्ली, हरियाणा और यूपी तक में जल संकट गहरा गया है। हथिनीकुंड बैराज, उत्तराखंड और हिमाचल की नदियों के तेज गति से आने वाले पानी को नियंत्रित करने का काम करता है। यहीं से यमुना का जल तीन हिस्सों में बंट जाता है। पहला हिस्सा पश्चिमी यमुना नहर में जाता है, जो हरियाणा को चला जाता है। यह पानी आगे चलकर दिल्ली व राजस्थान के भी काम आता है। 

बैराज से यमुना के पानी का दूसरा हिस्सा उत्तर प्रदेश की तरफ चला जाता है, इससे उत्तर प्रदेश के लोग सिंचाई करते हैं। तीसरा हिस्सा मुख्य यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है। इस साल पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश न होने से हथिनीकुंड बैराज जल संकट से जूझ रहा है। क्षमता से बहुत कम पानी यहां पहुंच पा रहा है। आलम यह है कि यमुना के बीच में खाली टापू नजर आने लगे हैं। 

हालांकि, बुधवार-गुरुवार को पहाड़ों में बारिश हुई है। अफसरों के अनुसार, वह पर्याप्त नहीं है। 20 जून को भी यमुना में न्यूनतम 352 क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया है। जानकारों की माने तो हथिनीकुंड बैराज पर 20 वर्षों में कभी इतना जल संकट देखने को नहीं मिला, जितना इस साल देखने में आ रहा है।

दिल्ली में शोधन प्रक्रिया के बाद बचा पानी सप्लाई लायक बनाया जा रहा

दिल्ली में लगातार बढ़ रहे पानी के संकट को कम करने के लिए जल बोर्ड तमाम प्रयास कर रहा है। जल शोधन संयंत्रों में शोधित करने की प्रक्रिया में बचने वाले पानी को दोबारा से शोधित करके पीने लायक बनाया जा रहा है। इस पानी की वजह से कई प्लांट से क्षमता से ज्यादा सप्लाई दी जा रही है। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद दिल्ली में जल संकट से निजात नहीं मिल पा रही है। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि जल शोधन के दौरान करीब पांच फीसदी पानी बेकार हो जाता है। सामान्य तौर पर इस पानी को यमुना या पानी के अन्य स्रोत में डाल दिया जाता है।