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केंद्र ने दिल्ली से किया सौतेला व्यवहार, एमसीडी को नहीं दिया पैसा; बजट पर क्यों भड़की आप

दिल्ली सरकार ने केंद्र पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय बजट में दिल्ली को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अलग-अलग मद में कुल 1168 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

केंद्र ने दिल्ली से किया सौतेला व्यवहार, एमसीडी को नहीं दिया पैसा; बजट पर क्यों भड़की आप
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 02 Feb 2024 05:25 AM
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केंद्रीय बजट में दिल्ली सरकार को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अलग-अलग मद में कुल 1168 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पिछले बजट की तुलना में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और वह जस का तस है। सिर्फ प्वॉइंट में बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली सरकार की मांग के बाद भी केंद्रीय करों में भागीदारी फिर नहीं बढ़ाई गई है। एमसीडी के लिए अलग से कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है। दिल्ली सरकार की वित्त मंत्री आतिशी ने केंद्र सरकार पर दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली सरकार को सबसे अधिक फंड 951 करोड़ रुपये का आवंटन अलग-अलग योजनाओं में केंद्रीय सहायता के रूप में आवंटित किया गया है। इसके अलावा आपदा बचाव फंड के रूप में बीते साल की तरह 15 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सिख दंगा पीड़ितों के लिए दो करोड़ रुपये और अतिरिक्त केंद्रीय सहायता योजना के लिए 200 करोड़ रुपये मिले हैं। दिल्ली सरकार को केंद्रीय बजट में कोई आवंटन नहीं किया गया है।

दिल्ली की वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि भाजपा शासित केंद्र सरकार ने फिर दिल्ली के साथ सौतेले व्यवहार की परंपरा जारी रखी है। अगर दिल्ली को उसके अधिकार के तहत केंद्रीय करों में भागीदारी मिले तो दिल्ली को कम से कम 15 हजार करोड़ मिलने चाहिए। केंद्र सरकार दिल्लीवालों के इस अधिकार के तहत पैसा नहीं देती है, इसलिए इस बार दिल्ली को महज एक हजार करोड़ रुपये मिले हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में देशभर की स्थानीय निकायों के लिए अलग से प्रावधान किया है, लेकिन दिल्ली की एमसीडी के लिए एक रुपये का प्रावधान नहीं किया है। यह दिल्ली के प्रति सौतेला व्यवहार है। उन्होंने कहा कि फिर भी हम दिल्लीवालों के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रोजगार को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा

वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि भाजपा शासित केंद्र सरकार के केंद्रीय बजट ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ घोषणाओं की सरकार है। वर्ष 2014 में भाजपा ने कहा था कि बहुत हुई बेरोजगारी की मार, अबकी बार मोदी सरकार। तब हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा किया था, आज दस साल हो गए कहां हैं वो नौकरियां। क्या दस साल में 20 करोड़ लोगों को नौकरियां मिली हैं। बहुत बड़ी बात हो होगी, अगर एक करोड़ नौकरियां भी दे पाएं। निजी क्षेत्र में नौकरियों को छोड़िये, केंद्र सरकार में दस लाख पद खाली हैं, लेकिन भर्तियां नहीं हो रही हैं। आज फिर केंद्रीय बजट में 55 लाख नौकरी देने की घोषणा की गई है। आतिशी ने कहा कि बजट में महंगाई से लड़ने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।

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