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उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका, सिब्बल बोले- बदल गए हैं हालात, वजह भी बताई

जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी जमानत याचिका बुधवार को वापस ले ली है। वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने की अपील की। उन्होंने इसकी वजहें भी बताई...

उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका, सिब्बल बोले- बदल गए हैं हालात, वजह भी बताई
Krishna Singhएएनआई,नई दिल्लीWed, 14 Feb 2024 03:04 PM
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जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी जमानत याचिका बुधवार को वापस ले ली। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने उन्हें जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दी। खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि चूंकि परिस्थतियां बदल गई हैं और ट्रायल कोर्ट के समक्ष नए सिरे से जमानत मांगने का प्रयास है, इस वजह से याचिका वापस ली जा रही है। 

सिब्बल ने कहा- जमानत याचिका को हम वापस लेना चाहते हैं। परिस्थितियों में बदलाव आया है। हम ट्रायल कोर्ट में अपनी किस्मत आजमाएंगे। हालांकि, सिब्बल ने परिस्थितियों में बदलाव के बारे में विस्तार से नहीं बताया। पीठ ने सिब्बल के अनुरोध को स्वीकार कर लिया और खालिद की जमानत याचिका वापस लेने का आदेश दिया। बता दें कि उमर खालिद फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित साजिश से संबंधित यूएपीए मामले में हिरासत में है। 

खालिद ने अक्टूबर 2022 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने खालिद की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी क्योंकि वह अन्य सह-अभियुक्तों के साथ लगातार संपर्क में था और उसके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही थे। 

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपियों की हरकतें प्रथम दृष्टया गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत 'आतंकी कृत्य' के रूप में योग्य हैं। सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए खालिद ने इस आधार पर हाईकोर्ट से जमानत मांगी थी कि दिल्ली दंगों में उसकी ना तो कोई आपराधिक भूमिका थी और ना ही किसी साजिश के लिए अन्य आरोपी के साथ संबंध था। वहीं दिल्ली पुलिस ने खालिद की जमानत याचिका का विरोध किया था। 

उल्लेखनीय है कि खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने के आरोप में यूएपीए और आईपीसी के कई प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

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