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कितना भी पानी गिरे, यमुना में इस साल नहीं आएगी बाढ़; भारद्वाज ने बताया 'पायलट कट' प्लान

सौरभ ने बताया कि 'पायलट कट' प्रयोग के तहत बैराज के ठीक सामने जमा मिट्टी से बहुत दूर तक छोटी-छोटी नहरें बना दी जाती हैं। इस दौरान नहरों के बीच में मिट्टी के टापू बन जाते हैं, जो पानी के साथ बह जाते हैं

कितना भी पानी गिरे, यमुना में इस साल नहीं आएगी बाढ़; भारद्वाज ने बताया 'पायलट कट' प्लान
Sourabh JainPTI,नई दिल्लीTue, 11 Jun 2024 07:39 PM
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दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री सौरभ भारद्वाज का कहना है कि यदि पिछली बार की तरह ही अगर इस बार भी यमुना में भारी मात्रा में पानी आता है तो भी दिल्ली में बाढ़ नहीं आएगी। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके विभाग ने इस बार ऐसी तैयारी की है कि नदी को बहने के लिए साफ रास्ता मिलेगा जिससे पानी अपनी सीमा को लांघकर यहां-वहां नहीं जाएगा। सौरभ ने बताया कि इसके लिए विभाग ने इस बार 'पायलट कट' प्लान का नया प्रयोग भी किया है। 

भारद्वाज ने ये बातें मंगलवार को ITO स्थित यमुना के बैराज की स्थिति का जायजा लेने के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहीं। उन्होंने कहा पिछले साल जैसी बारिश हुई थी और हरियाणा की तरफ से जितना पानी यमुना में छोड़ा गया था, बीते कई दशकों में इतना पानी कभी यमुना में नहीं आया था। 

उन्होंने कहा कि 'हालांकि यह बैराज हरियाणा सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इस बैराज के संचालन की जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की है, परंतु बीते वर्ष की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही इस बार दिल्ली सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार के साथ तालमेल करके सारी तैयारियां की हैं।'

आगे उन्होंने बताया कि 'विभाग द्वारा इस बार ऐसी तैयारी की गई है, कि अगर पिछली बार जैसा पानी भी यमुना में आ जाएगा तो भी दिल्ली यमुना में बाढ़ नहीं आएगी और यमुना का पानी सड़कों पर नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि लगभग पिछले तीन महीने से यह काम चल रहा है और सभी बैराज के आसपास से बड़ी मात्रा में जमा मिट्टी को हटा दिया गया है और सभी बैराजों को खोल दिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ बैराज जो नहीं खुल पा रहे थे उनको काटकर अलग हटा दिया गया है ताकि पानी के प्रवाह में किसी प्रकार की कोई रुकावट न आए।'

सौरभ ने बताया क्या होता है 'पायलट कट' प्लान?

दिल्ली सरकार के मंत्री ने बताया कि इस बार यमुना में पानी इकट्ठा ना हो और बाढ़ की स्थिति पैदा ना हो उससे निपटने के लिए पहली बार 'पायलट कट' प्रयोग सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा किया गया है। इस प्रयोग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत बैराज के सामने वर्षों से जमा मिट्टी को बीच से खोदते हुए बहुत दूर तक छोटी-छोटी नहरें बना दी जाती हैं। इस दौरान कृत्रिम नहरों के बीच में मिट्टी के छोटे-छोटे टापू भी बन जाते हैं, तो पानी के साथ बह जाते हैं। जैसे इस बार जब पीछे से हरियाणा की तरफ से बारिश का पानी छोड़ा जाएगा, तो वह तेज बहाव के साथ इन कृत्रिम नहरों से होते हुए गुजरेगा तो अपने साथ मिट्टी के इन छोटे-छोटे टापुओं को भी साथ ले जाएगा।

 

उनके मुताबिक इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि यमुना में पानी जमा होने की कोई संभावना नहीं बचेगी, जिससे पानी को बहने के लिए निर्बाध प्रवाह मिलेगा और बाढ़ की आशंका नहीं रहेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यमुना में पिछली बाढ़ के दौरान कुछ स्थानों पर रेगुलेटर टूटने की घटनाएं हुई थीं। मंत्री ने कहा, 'इस बार ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए सभी रेगुलेटर की मरम्मत की गई है। टूटे हुए रेगुलेटर को बदल दिया गया है... और सभी रेगुलेटरों का परीक्षण किया गया है।'