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गाजीपुर बॉर्डर पर ममता के इंतजार में रही गहमागहमी, राकेश टिकैत ने किसानों संग किया हवन

ट्रांस हिंडन। संवाददाताPublished By: Praveen Sharma
Fri, 30 Jul 2021 02:45 PM
गाजीपुर बॉर्डर पर ममता के इंतजार में रही गहमागहमी, राकेश टिकैत ने किसानों संग किया हवन

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के आंदोलन कर रहे किसानों और सरकार के बीच गतिरोध अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। दिल्ली-गाजियाबाद को जोड़ने वाले गाजीपुर बॉर्डर स्थित धरनास्थल पर शुक्रवार सुबह से ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आने के इंतजार में किसानों के बीच गहमागहमी बनी हुई है। 

जानकारी के अनुसार, दिल्ली दौरे पर आईं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शुक्रवार को गाजीपुर बॉर्डर पर आने का कार्यक्रम है। ममता के आने से पहले ही धरनास्थल पर सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बंगाल की मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए पुलिस ने धरना स्थल के आसपास गहनता से जांच की। वहीं बम निरोधक दस्ता व खुफिया विभाग भी अलर्ट पर रहा।

भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मीडिया के माध्यम से पता चला कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गाजीपुर बॉर्डर पर आने की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बात नहीं मान रही है। बॉर्डर पर और पक्के टेंट डालने पड़ेंगे। यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के प्रश्न पर राकेश टिकैत ने कहा कि 5 सिंतबर को मुजफ्फरनगर की महापंचायत में आगामी रणनीति को लेकर बैठक करेंगे। किसानों ने लखनऊ समेत पूरे यूपी में आंदोलन का प्लान बनाया है। लोकतांत्रिक प्रणाली में किसान अपनी बात कहने का तरीका अजमा रहे हैं। सरकार कैसे सुनेगी यह देखते हैं। आंदोलन कमजोर नहीं होगा, हम आंदोलन करते रहेंगे। किसान देशभर में जाकर पंचायत करेंगे। इसके सिवाय किसान और क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव में किसानों ने पंचायत कर कहा था कि बीजेपी को वोट न दें। साथ ही ममता बनर्जी ने आश्वासन दिया था कि किसानों को लेकर सरकार से बात करेंगी। इस दौरान भाकियू नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशान साधा। उनका कहना है प्रदेश में कम काम हुआ। 

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वहीं, टिकैत ने शुक्रवार को किसानों के साथ मिलकर गाजीपुर बॉर्डर स्थित धरनास्थल पर हवन-पूजन भी किया। टिकैत ने कहा कि सरकार को हमारी मांगें माननी होंगी, कानून वापसी तक किसान हटने वाला नहीं है।

बिहार के पूर्व कृषि मंत्री भी पहुंचे 

बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने गाजीपुर बॉर्डर पहुंचकर कहा कि सरकार ने जन विरोधी कदम उठाया है। सरकार किसानों का भला करना चाहती है तो किसान नेताओं से बात करे।   

 

गौरतलब है कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली और हरियाणा की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। वे इन तीनों कानूनों को रद्द करने और फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने के लिए एक नया कानून लाने की मांग कर रहे हैं। इन विवादास्पद कानूनों पर बने गतिरोध को लेकर हुई किसानों और सरकार के बीच हुई कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही। कृषि कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसान इस मुद्दे पर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं। किसानों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें मानने की अपील की है। वहीं सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन संशोधन संभव है।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों - द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं। केन्द्र सरकार सितंबर में पारित किए तीन नए कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे। 

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