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8 मई, 2021|12:34|IST

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निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी, संप्रभुता और देश की अखंडता के बीच संतुलन होना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट

delhi high court

दिल्ली हाईकोर्ट ने 'टूलकिट' मामले में गिरफ्तार पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि (Disha Ravi) की याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि निजता के अधिकार और लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व देश की संप्रभुता और अखंडता के बीच संतुलन होना चाहिए।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की बेंच ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह नियम दुनियाभर में बहुत ही विवादित मुद्दा रहा है और भारत इसके लिए कोई अपवाद नहीं है। हाईकोर्ट की टिप्पणी दिशा रवि द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें दिल्ली पुलिस को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह दिशा के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में कोई जांच सामग्री मीडिया या किसी भी तीसरे पक्ष को लीक न करे।

कोर्ट ने इस मामले में आगे विस्तार से सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख तय करते हुए सभी पक्षों से अपने जवाब और प्रतिवाद दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी पत्रकार को खबर की पुष्टि के लिए अपने सूत्र का खुलासा करने के लिए नहीं कहा जा सकता है, लेकिन वे खबरों की प्रमाणीकता जरूर सुनिश्चित करेंगे। 

हाईकोर्ट ने मीडिया से यह सुनिश्चित करने को कहा कि केवल सत्यापित सामग्री ही प्रकाशित की जाए और वह पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि के खिलाफ दर्ज एफआईआर के सिलसिले में चल रही जांच को बाधित न करें।

दिशा रवि की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने तथाकथित वॉट्सऐप चैट के संदर्भ में तीन न्यूज चैनल्स (टीवी टुडे, टाइम्स नाउ और न्यूज 18) पर चल रही खबरों और ट्वीट्स अपने ऑनलाइन प्लैटफार्मों से हटाने का निर्देश देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के किसी विशेष विवरण को सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा न होने से रोकने के लिए उक्त मीडिया हाउसों को निर्देश दिए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने जांच की महत्वपूर्ण जानकारी मीडिया में लीक कर दी है।

इस बीच, दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि दिशा रवि का कहना है कि मैसेज 3 फरवरी के हैं, जबकि उसका फोन 13 फरवरी को जब्त कर किया गया था, वह इसे 3 से 13 फरवरी के बीच खुद लीक कर सकती थी, जबकि उसका फोन उसके पास था।

दिल्ली पुलिस ने एक विस्तृत हलफनामे में कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और पुलिस ने ना कुछ लीक किया है और ना मीडिया के साथ कोई इनपुट और डेटा शेयर किया है।

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  • Web Title:There should be balance between right to privacy freedom of speech sovereignty and integrity of country: Delhi High Court