DA Image
हिंदी न्यूज़ › NCR › हथियारों के शौकीनों की बढ़ी परेशानी, सरेंडर किया गया तीसरा असलाह बना सिरदर्द
एनसीआर

हथियारों के शौकीनों की बढ़ी परेशानी, सरेंडर किया गया तीसरा असलाह बना सिरदर्द

गाजियाबाद | वरिष्ठ संवाददाताPublished By: Praveen Sharma
Sun, 19 Sep 2021 02:21 PM
हथियारों के शौकीनों की बढ़ी परेशानी, सरेंडर किया गया तीसरा असलाह बना सिरदर्द

हथियारों के शौकीनोंं के लिए बुरी खबर है। एक साथ तीन शस्त्र लाइसेंस रखने वालों के लिए तीसरा शस्त्र अब सिरदर्द बन गया है। तीसरा लाइसेंस रद्द होने के बाद अब उस शस्त्र का निस्तारण करना मुश्किल हो रहा है। कुछ लाइसेंस धारकों ने अपना तीसरा शस्त्र मालखाने में जमा करा दिया है, तो वहीं कुछ ने इसे निजी शस्त्र विक्रेताओं के पास सरेंडर कर दिया है। इसके लिए उन्हें मासिक किराया देना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक व्यक्ति दो शस्त्र लाइसेंस से ज्यादा नहीं रख सकता। ऐसे में जिन लोगों के पास तीन शस्त्र लाइसेंस थे, उन्हें फरवरी 2021 तक अपना तीसरा लाइसेंस रद्द कराकर उसका शस्त्र सरेंडर करना था। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में तीन शस्त्र लाइसेंस धारकों की संख्या 37 है। इनमें से 30 से अपने शस्त्र जमा कर दिए हैं, लेकिन बाकी सात लोगों ने अभी तक इन्हें जमा नहीं किया है। इन सभी सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र भेजा गया है। यदि उन्होंने तीसरे शस्त्र लाइसेंस के संबंध में जमा न करने का कोई उचित जवाब नहीं दिया तो उनके बाकी कि शस्त्र लाइसेंस भी रद्द कर दिए जाएंगे।

रिवॉल्वर के लिए हर माह 500 रुपये किराया

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, गाजियाबाद जनपद में कई ऐसे लाइसेंस धारक हैं जिनके पास पिस्टल, राइफल व रिवॉल्वर हैं। उन्होंने तीसरे शस्त्र के रूप में रिवॉल्वर सरेंडर की है। इन रिवॉल्वर को उन्होंने मालखाने में जमा न करके शस्त्र विक्रेता की दुकान पर जाम किया है। दुकानदार को इसको रखने के एवज में 500 रुपये मासिक किराया भी देना पड़ा रहा है। अब इस रिवॉल्वर का कोई खरीदार भी नहीं मिल रहा है।

अधिकतर बाबूजी की बंदूक हो गई जमा

तीन लाइसेंस धारकों में अधिकतर सरेंडर करने वाले शस्त्र बंदूक हैं। यह वो बंदूक हैं जो पुराने समय में बाबूजी की थी और अब वह वारिसान के रूप में अपने लाइसेंस पर चढ़ा ली गई थीं। वहीं, अब उन्हें इन बंदूक का लाइसेंस सरेंडर करना पड़ गया। पुरानी बंदूक का कोई खरीदार न होने के कारण इनको मालखाने में ही जमा किया गया। शस्त्र लाइसेंस की दुकान पर यह बंदूक किराये में ही दुकानदार की होने का डर है। 

संबंधित खबरें